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रविवार, 22 जनवरी 2012

कल कह ना सकूं

कल कह ना सकूं
दिल की बात आज ही
कहना चाहता हूँ
=============
रात सोऊँ 
सवेरे उठ ना पाऊँ
इस तरह दुनिया से
रुखसत होना चाहता हूँ 
सबको हँसते गाते
छोड़ कर जाना चाहता हूँ 
जानता हूँ जब भी 
कोई अपना जाता है 
दिल कितना रोता है
किसी अपने को
रुलाना नहीं चाहता हूँ
याद कर
आंसू ना बहाए कोई
जाने के बाद 
किसी को याद नहीं आऊँ
ज़िन्दगी के सफ़र में
मिला था मुसाफिर कोई
समझ कर भुला दिया जाऊं
दुखाया हो 
दिल किसी का कभी
हुई हो गलती कोई
तो जीते जी
माफ़ कर दिया जाऊं  
जाने के बाद
किसी का दिल दुखाना
नहीं चाहता हूँ
जिन्हे ख़ुशी नहीं दे सका  
उन्हें खुश देखना चाहता हूँ
जिन्हें अपना
 ना बना ना सका 
उन्हें अपना बनाना चाहता हूँ
बचे वक़्त का हर लम्हा
दूसरों के लिए जीना
चाहता हूँ
जो चाहता है मुझे 
मिल नहीं सका जिससे
उससे मिलना
चाहता हूँ
कल कह ना सकूं
दिल की बात आज ही
कहना चाहता हूँ
बद्दुआ लेकर नहीं
दुआएं ले कर 
सुकून से जाना चाहता हूँ   
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
15-01-2012
43-43-01-12

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर...........
    किसी अपने और वो भी किसी नेक के जाने से रोना तो लाज़मी है....
    हाँ मगर अच्छी बातें याद कर कोई आंसूं बहाए तो जीवन सार्थक हुआ समझो..
    बहुत अच्छी रचना..
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut hi bhavpurn rachna hai ,dil chhu gaee... bdhai sweekaren....

    उत्तर देंहटाएं
  3. ये कशमकश ही जीवन का मूल मन्त्र हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. जाने वाला जैसा भी सोंचे -पर याद करने वाले और अपने कफन को देख नहीं सकता !बेहतर प्रस्तुति !

    उत्तर देंहटाएं
  5. हर कोई यही चाहता है ...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
  6. किसी को दुख न देने की कामना श्रेष्ठ कामना है।
    गहरे भावों वाली सुंदर कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  7. रात सोऊँ सवेरे उठ
    ना पाऊँ
    इस तरह दुनिया से
    रुखसत होना चाहता हूँ ...

    यही सबसे उत्तम रुखसती है... लेकिन ऐसी खुशनसीबी भी तो हो...

    उत्तर देंहटाएं