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मंगलवार, 24 जनवरी 2012

कैसे अहसान चुकाएँ तुम्हारा ?

दर्द दिए लोगों ने
तुमने हमें सुकून दिया
ज़ख्म दिए लोगों ने
तुमने मरहम लगाया
लोगों ने रास्ता
दोजख का दिखाया
तुमने फिर से हँसना
सिखाया
जीना भूल गए थे
तुमने फिर से जीना
सिखाया
जो भी सिखाया तुमने
हमने ज़िन्दगी में उतारा
जानते नहीं
कैसे अहसान चुकाएँ
तुम्हारा ?
क्या करें जो दिल का
बोझ हल्का कर दे?
अहसानों के
कर्जे को कम कर दे
हमारे सुकून में इजाफा
कर दे
अहसान फिर भी चुका
ना पायेंगे
कतरा भी ना दे पायेंगे
उसका
जितना तुमने दिया
हमको
15-01-2012
46-46-01-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. अपनेपन का अपनों पर एहसान कैसा..
    सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिसने ये सब दिया उसका एहसान न मान कर अपना माने .. सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  3. ह्रदय ने झुकना कुबूल किया है यही क्या कम है वरना अकड़ में सभी अहसान फरोश ही हो जाते हैं..अच्छी लगी..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं