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शनिवार, 28 जनवरी 2012

दिल किस के बस में है



दिल
किस के बस में है
अब तक पता नहीं चला
ज़िन्दगी क्यों बेबस है
ये भी पता नहीं चला
कोई तो है
जिस की चाह में
ना अब तक मन लगा
ना सुकून मिला
कहाँ छुपा है ?
कब मिलेगा ?
ये भी नहीं पता
इंतज़ार में ज़िंदा हूँ
उम्मीद में जीता हूँ
कोई तो है
इतना ज़रूर पता है
19-01-2012
62-62-01-12

8 टिप्‍पणियां:

  1. बस उम्मीद बनी रहनी चाहिए .. अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर।
    आज सरस्वती पूजा निराला जयन्ती
    और नज़ीर अकबारबादी का भी जन्मदिवस है।
    बसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  3. निरंतर
    इंतज़ार में ज़िंदा हूँ
    उम्मीद में जीता हूँ
    इतना ज़रूर पता.............उम्मीद कायम रहे

    उत्तर देंहटाएं
  4. उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है..
    सुन्दर प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  5. जब इतनी चाह है तो वो भी मि‍ल ही जाएगा जि‍सका इंतजार है....अच्‍छी लगी कवि‍ता।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज 29/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    आज चर्चा मंच पर देखी |
    बहुत बहुत बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  8. जब इतनी गहरी इक्षा से कुछ चाहे तो मिल ही जायेगा ..
    उम्मीद को कायम रखे ..
    बेहतरीन रचना .

    उत्तर देंहटाएं