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रविवार, 29 जनवरी 2012

सोना तो सोना ही रहेगा

वक़्त की मार से
काला पड़ गया
मिटटी में दबा हुआ
लोहे का टुकडा
सदा सोचता था
कोई उसे मिटटी से निकाले
झाड पोंछ कर फिर से
काम आने लायक बना दे
किस्मत ने
उसे चमकते सोने का
साथ दे दिया
सोने का साथ मिलते ही
लोहा चमकने लगा
भ्रमित हो गया
अपने को
सोना समझने लगा
सपनों की
दुनिया में खोने लगा
राह से भटकने लगा  
निरंतर सोने का सानिध्य
चाहने लगा
भूल गया था
सैकड़ों हथोड़े खाया हुआ
कई बार तपाया गया
लोहे का टुकडा था
सोने के साथ कितना भी
चमक जाए 
लोहा ही रहेगा
एक दिन उसने सुन लिया
कोई कह रहा था
लोहा सोने के साथ
क्या कर रहा
तुरंत उसे याद आया
वो मात्र लोहे का टुकडा था
सोना तो सोना ही रहेगा
निरंतर चमकता रहेगा
जिसे के भी साथ रहेगा
उसकी कीमत बढ़ाएगा
सोच विचार के बाद
विनम्रता से सोने से बोला
मुझे भूलना नहीं
निरंतर साथ निभाना
दूर से ही सही
अपनी चमक से
नहलाते रहना 
ज़िन्दगी के हथोडों से
बचने का तरीका बताते रहना
कभी पथ से ना डिगने देना
मंजिल तक पहुंचाना
फिर से 
किसी लायक बन कर
किसी के काम आऊँ
ऐसी हिम्मत देते रहना 
अपना स्नेह बनाए
रखना
19-01-2012
65-65-01-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. सोना तो सोना ही रहेगा,...
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. स्नेह से तो हर रिश्ता कायम हैं इस जहान में ....

    हां सोना तो सोना ही रहेगा ....पर लोहे ...का अपना ही मोल हैं

    उत्तर देंहटाएं
  3. ज़िन्दगी के हथोडों से
    बचने का तरीका बताते रहना
    कभी पथ से ना डिगने देना
    मंजिल तक पहुंचाना
    फिर से
    किसी लायक बन कर
    किसी के काम आऊँ
    ऐसी हिम्मत देते रहना
    अपना स्नेह बनाए
    रखना

    ameen......

    उत्तर देंहटाएं
  4. yes,sona to sona hi hai.uski shuddhta per koi sawal nahi tab tak jab tak ki usme thoda copper na mila diya jaaye...

    उत्तर देंहटाएं