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शनिवार, 21 जनवरी 2012

कई बार हँसा हूँ , कई बार रोया हूँ

कई बार हँसा हूँ
कई बार रोया हूँ
कई बार जला हूँ
कई बार बुझा हूँ
चोट खाता रहा हूँ
सहता रहा हूँ
फिर भी जीता
रहा हूँ
किस्मत से लड़ता
रहा हूँ
टूटा हूँ मगर थका
नहीं हूँ
नाउम्मीद अब भी
नहीं हूँ
अब भी नए लोगों से
मिलता हूँ
नए दोस्त बनाता हूँ
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"
14-01-2012
40-40-01-12

14 टिप्‍पणियां:

  1. जिंदगी का सफ़र यूँ ही चलता रहे..

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिन्दगी यूं ही चलती रहे..यही जीवन है..

    उत्तर देंहटाएं
  3. jeevan yun hi gujarta rahe .....muskaan sadaiv bani rahen
    yahi jeevan ka sach hai
    safar yun hi chalta rahe ...........:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. yahi to jeevan hai....kabhi khushi kabhi gham..par umeed hamesha kayam rahe ...nice poem :) welcome to my blog

    उत्तर देंहटाएं
  5. जीना इसी का नाम है...
    सुन्दर रचना...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 23-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  7. सकारातम्क सोच के साथ खूबसूरती से उकेरा हें

    उत्तर देंहटाएं
  8. apki dosti ke jajbe ko salam ....aj charchamanch pr apki yh prabhavshali rachana padhane ko mili ....bahut bahut abhar Nirantar ji.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सार्थक सन्देश देती रचना .सकारात्मक सोच है तो ज़िंदा हूँ

    उत्तर देंहटाएं
  10. जिंदगी के अनेक रूप ...वाह बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  11. बस इसी तरह सकारात्मक सोच के साथ जिना चाहिये
    बेहतरीन प्रस्तुती...
    mauryareena.blogspot.com

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