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बुधवार, 11 जनवरी 2012

ज़ज्बातों को कैसे छुपाऊँ?

कैसे ज़ज्बातों को
छुपाऊँ?
कैसे दिल की आग
बुझाऊँ
कैसेचाहत को सीने में
दबा कर  रखूँ?
कैसे ख्यालों के
समंदर को
उफनने से रोकूँ?
क्यों उनसे
ख्वाबों में ना मिलूँ?
कैसे हसरतों को
मचलने  ना दूं?
क्यूं ना उनसे ही
पूछ लूं?
ज़रिये नज़्म
हाल-ऐ-दिल बता दूं
या तो वो समझ जायेंगे
ज़रिये पैगाम
अपनी रज़ा बता देंगे
नहीं तो मोहब्बत पर
एक और नज़्म
समझ कर पढ़ लेंगे
अरमानों को ठंडा कर देंगे
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
03-01-2012

12-12-01-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाह....इतनी शि‍द़द़त....वो समझेंगे जरूर एक दि‍न, न होंगे अरमान ठंडे....।

    उत्तर देंहटाएं
  2. हाले दिल मैं किसी से कहूँ कैसे .....

    बहुत बढिया लिखा है

    उत्तर देंहटाएं