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शनिवार, 14 जनवरी 2012

दिन बदला,तारीख बदली

दिन बदला 

तारीख बदली  

ना धूप बदली ना ही 

हवा बदली 

ना ही सूरज,चाँद बदला 

ज़िन्दगी भी नहीं 

बदलती 

कभी होठों पर हंसी 

कभी आँखों में 

नमी होती 

निरंतर नए रंग रूप 

में आती 

आशा निराशा के 

भावों से 

अठखेलियाँ करती 

चैन की उम्मीद में 

बेचैनी पीछा नहीं 

छोडती

07-01-2012
18-18-01-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. चैन की उम्मीद में
    बेचैनी पीछा नहीं
    छोडती.....waah! kya baat hai kitni saarthk panktiyaan hai,...bdhaai ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. "चैन की उम्मीद में
    बेचैनी पीछा नहीं
    छोडती"

    amazzing....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही बेहतरीन कविता,ह्दय को छू गई।

    उत्तर देंहटाएं