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शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

अब क्यों पहचानेगा कोई मुझको?


अब क्यों पहचानेगा
कोई मुझको
सब चढ़ गए सफलता की
सीढ़ियों पर सीढियां
सहारा ले कर पहुँच गए
इतनी ऊंचाई पर
दिखता नहीं कोई उन्हें
वहां से
मैं जहां था वहीँ खडा हूँ
अब भी हाथ वैसे ही
बढाता हूँ
जिसे लेना है जी भर कर
ले ले सहारा मेरा
निरंतर
सफलता की सीढियां
चढ़ता जा
आकाश कीऊचाइयों को
छूता जा
याद करे तो फितरत
उसकी
नहीं करे तो इच्छा
उसकी
बस इतना सा याद
रख ले
उतरेगा जब भी नीचे
कोई ना पहचानेगा उसे
रोयेगा तो भी
कंधे पर हाथ नहीं
रखेगा
कोई उसके
06-01-2012
15-15-01-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. दुनिया की रीत ही निराली हैं ....ऊँचाई से नीचे के लोग नज़र नहीं आते

    उत्तर देंहटाएं
  2. jab bhi koi kisi ka haath thamta hai to
    usse nahi chodata
    dost kabhi dosti nahi thodat
    rahe bhale hi juda ho jaye
    par dil kabhi dokha nahi deta .........!

    saaf dil hamesha saaf hota hai
    maan ki aanhken jitna hi maan saaf hota hai ....!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया!
    लोहड़ी पर्व की बधाई और शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं