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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

नए साल का शोर मच रहा है

शुभ कामनाओं का
दौर चल रहा है
नए साल का शोर
मच रहा है
हर व्यक्ति खुश हो रहा है
आस लगाए बैठा हैं
चमत्कार हो जाएगा
सब कुछ बदल जाएगा
इस प्रयास में लगा है 
सब बदल जाएँ 
पर खुद को
नहीं बदलना पड़े
मैं हैरान  हूँ  
समझ नहीं आ रहा
सब कैसे बदल जाएगा ?
कैसे समझाऊँ उन्हें ?
फितरत और सोच
बदले बिना
स्वार्थ को छोड़े बिना
कुछ नहीं बदला कभी
अब कैसे बदल जाएगा ?
नए साल में खुद को
बदलो
समय के साथ
सब बदल जाएगा
03-01-2012
09-09-01-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. राजेन्द्र जी नमस्कार, नव वर्ष की हार्दिक बधाई। बढिया रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर अभिव्यक्ति,हम बदलेगे तो सब बदल जाएगा, बढ़िया रचना,....
    welcome to new post --"काव्यान्जलि"--

    उत्तर देंहटाएं