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शनिवार, 5 नवंबर 2011

तुम्हारी शरारत नहीं गयी


तुम्हारी
खुशबू दिल में बसी
तुम्हारी
बातें जहन में छायी
तुम जुदा हो गयी
मगर
तुम्हारी आदत नहीं गयी
मेरी तो
ज़िन्दगी तबाह हो गयी 
तुम्हारी
शिकायत नहीं गयी
पराया
समझ मुंह फिराती हो
निरंतर सताती हो
जी भर के रुलाती हो
जुदा होने के बाद भी
तुम्हारी
शरारत नहीं गयी
04-11-2011
1745-14-11-11

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

तुम्हें याद रहे ना रहे मुझे याद रहेगा

तुम्हें याद रहे ना रहे
मुझे याद रहेगा
मोहब्बत की शाम का
ढलता सूरज 
हमेशा याद रहेगा
तुमसे जुदाई का 
लम्हा कभी ना भूलेगा
दर्द जो उठा था दिल में
निरंतर याद रहेगा
सपना जो टूट गया
कभी ना भूलेगा
ज़िन्दगी भर ग़मों का
मंजर याद रहेगा
अश्क़ बहने के 
आगाज़ का वक़्त
याद रहेगा 
तुम्हें याद रहे ना रहे
मुझे याद रहेगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
04-11-2011
1744-13-11-11

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

मुझे डूबने ना देते


इसी में खुश हूँ
कुछ लोग निरंतर
मुझे याद तो
करते
मेरी हंसी ना
उड़ाते
मुझे अपना दोस्त
मानते
मेरे दुखों को
समझते
प्रेम से ज़िन्दगी में
साथ तैरते
मुझे डूबने ना
देते
03-11-2011
1743-12-11-11

चाँद ने उन्हें देखा तो शरमा गया


चाँद ने
उन्हें देखा तो
शरमा गया
कोई उसे से भी
खूबसूरत है
उसे पता ना था
मन ही मन सोचने
लगा
खुदा का ढंग भी
निरंतर
निराला होता  
सारा जहां उसे
खूबसूरत कहता  
खुदा चुपके से
उस से
सुन्दर चेहरा
घडता   
03-11-2011
1743-12-11-11

सफ़र को सुहाना कर दो


कुछ कदम
साथ चल लो
कुछ लम्हों का
सहारा दे दो 
अनचाहे ही सही
मुझे बर्दाश्त कर लो
कुछ वक़्त
मुस्काराने दो
ग़मों को सहने का
दम दे दो
निरंतर चलना तो
मुझको होगा
लड़ना भी
मुझको होगा
थोड़ा वक़्त के लिए
ही सही
सफ़र को सुहाना
कर दो  
03-11-2011
1742-11-11-11

बुधवार, 2 नवंबर 2011

मैं फिर सोच में डूब गया........


अलसाया सा
मूढे पर बैठा था
सोच में डूबा था
चिड़िया की चहचाहट
ने ध्यान भंग किया
नज़रें उठायी
देखा तो रोशनदान पर
चिड़िया तन्मयता से
घोंसला बना रही थी
उसके सीधेपन  पर
ह्रदय में दुःख होने लगा
लोगों ने निरंतर
बड़े पेड़ों 
उनपर लगने वाले
घोंसलों को नहीं छोड़ा
अनगिनत पक्षियों को
बेघर किया
रोशनदान में लगे घोंसले
को कौन छोड़ेगा?
एक दिन इसे भी बेघर
होना पडेगा
अस्तित्व के लिए
लड़ना पडेगा 
मैं फिर सोच में
डूब गया........    
02-11-2011
1741-10-11-11

मन सिर्फ मिलने से नहीं मिलते


उनसे बात करता हूँ
तो पता नहीं क्यों
अपने राज़ खोलने
लगता हूँ
वो भी ध्यान से
सुनते है
फिर धीरे से कहते है
सब्र रखो
सब ठीक होगा
मुझे लगता है
कभी मिले नहीं
फिर भी
वो मुझे समझते हैं 
मन सिर्फ मिलने से
नहीं मिलते
निरंतर इस सत्य पर
विश्वास बढाते हैं
02-11-2011
1740-09-11-11

मेरी आँखें थकती क्यों नहीं ?


मुझे नहीं पता
मेरी आँखें थकती
क्यों नहीं ?
जब भी कोई खूबसूरत
चेहरा दिखता है
आँखें निरंतर उसका
पीछा करती रहती हैं
कभी लगता है
मेरी आँखों की आदत
खराब है
कभी सोचता हूँ
खूबसूरत चेहरों का
कमाल है
वजह चाहे कुछ भी हो
खूबसूरत चेहरों को 
उनकी ख़ूबसूरती का
अहसास कराने वाला
उन्हें इज्ज़त बख्शने
वाला भी चाहिए
02-11-2011
1739-08-11-11

आवाज़


मेरे कान में
जब से उन्होंने कहा
मेरे बिना
उनका दिल नहीं
लगता
उनकी आवाज़ ने
निरंतर दिल में
खुशी की इतनी
मधुर घंटियाँ बजायी
अब उनकी
गूँज के आगे 
कोई और आवाज़
मुझे अच्छी नहीं
लगती
02-11-2011
1738-07-11-11

तसल्ली


जब
खबर मिलती
वो तसल्ली से हैं
दिल को
सुकून मिलता
उनकी
तसल्ली ही तो
निरंतर
मेरी ज़िन्दगी का 
मकसद था
02-11-2011
1737-06-11-11

वो ऐसा क्यों करती है


मैं ही उसका
इंतज़ार क्यों करूँ
उसे पता है
मैं निरंतर
उसके इंतज़ार में
परेशाँ होता हूँ
एक लम्हा भी
चैन से नहीं बैठता
फिर भी वो ऐसा
क्यों करती है?
क्या मोहब्बत का
इम्तहान लेती है?
या फिर
मेरे परेशाँ चेहरे को
देख कर
मेरी मोहब्बत पर
अपना यकीन पुख्ता
करती  है
02-11-2011
1736-05-11-11

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

सुबह नौ बजे


सुबह नौ बजे का
वक़्त
मुझे काटने को
दौड़ता है
यही वक़्त तो था
जब उनका
मेरे घर के सामने से
गुजरना होता था
निरंतर मुस्कारहटों
का आदान प्रदान
होता था
यही वक्त तो था
जब मेरी तरफ
देखते हुए
उन्हें ख्याल ना रहा
उनका पैर फिसल
गया
बस ने उन्हें कुचल
दिया
मेरे हाथों में उन्होंने
दम तोड़ा
नौ बजे का वक़्त
क्यों आता है ?
इसके आने से पहले ही
दिल धड़कने लगता है
नौ बजे का वक़्त
मुझे काटने को
दौड़ता है
01-11-2011
1735-04-11-11