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शनिवार, 8 अक्तूबर 2011

छोटा सा दुःख




छोटा सा काँटा 
जी का 
जंजाल बन गया 
चलना फिरना दूभर 
हो गया
अथाह धन भी काम
ना आया 

आज काँटा निकल गया 
चलना फिर प्रारम्भ हुआ
मन में सुख का
संचार हुआ

छोटा सा दुःख भी 
कितना महत्त्व रखता
बड़ा सुख भी उसे 
कम नहीं कर पाता
अब पता चल गया

07-10-2011
1620-28-10-11

माँ तुमने कभी निराश नहीं किया

माँ तुमने कभी
निराश नहीं किया
जब भी विपत्ती आयी
तुम्हारे पास
दौड़ा चला आया
तुमने सीने से लगा कर
ढाढस बंधाया
भूख लगी,
तुमने भोजन खिलाया
सर दुखा ,
तुमने सर दबाया
नींद आयी,
तुमने गोद में सुलाया
घबराहट हुयी तुमने
पीठ पर हाथ फिराया
डर लगा तुमने
मुझे आँचल में छुपाया
खुद रोई
तुमने मुझे हँसाया
खुद जागी
तुमने मुझे सुलाया
मेरी नादानियों को
चुपचाप सहा
मेरी उम्मीदों को
सदा पूरा किया
माँ सदा तुमने
अपना धर्म निभाया
सदा निस्वार्थ प्यार दिया
खुद से ज्यादा मुझ को
समझा
अपने लिए कभी कुछ
ना माँगा
जो भी दिया तुमने दिया
जीते जी
मुझे प्रभु दर्शन कराया
माँ तुमने कभी निराश
नहीं किया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
07-10-2011
1619-27-10-11
माँ,Mother

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

कुछ तो रात गहरी थी


कुछ तो
रात गहरी थी
कुछ उसकी
याद सता रही थी
ज़ख्मों को
हरा कर रही थी
जज़्बातों में आग
लगा रही है 
दिल के सन्नाटे में
उसकी आवाज़ गूँज
रही थी
ख्वाबों की दुनिया में
सिर्फ वो नज़र आ
रही थीं
शराब निरंतर अपना
असर दिखा रही थी
हर घूँट के साथ
ज़िन्दगी
मौत लग रही थी
रोज़ की बात आज फिर
दोहरायी जा रही थी
किस्मत अपना खेल
दिखा रही थी
जुदाई के गम में
ज़िन्दगी
तमाम हो रही थी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
05-10-2011
1618-26-10-11

जुदाई,गम,मोहब्बत ,ज़िंदगी,किस्मत

अब मनानी है दीवाली तुम्हारी बाहों में




दिल में पल रहा
नफरत का रावण
तुम्हारी मीठी बातों ने
उग गया मोहब्बत का
सूरज
तुम्हारी अदाओं से
जाग गया
हसरतों का जहाँ
तुम्हारी मुस्काराहट से
अब मनानी है दीवाली
तुम्हारी बाहों में
जलाने हैं प्यार के दिए
साथ मिल कर
 करनी है
ज़िन्दगी रोशन
तुम्हारे
साथ गुजार कर
05-10-2011
1617-25-10-11

ये वक़्त की बात है आप कहीं हम कहीं और हैं


ये वक़्त की बात है
आप कहीं
हम कहीं और हैं
हम किस हाल में भी रहे 
आप निरंतर खुश रहे
ये हमारे
दिल की चाहत है
आपकी
 हर आह पर दिल
हमारा रोता
पर आप हँसते रहे
ये हमारी दिली तमन्ना है
हम चाहते
आप हमें भूल जाएँ
पर हम नहीं
भूल सकते आप को
आप को याद रखना
हमारी फितरत है
आपका
गुलशन आबाद रहे
ये हमारी हसरत है
05-10-2011
1616-24-10-11

झूठे ही सही दो आँसू ढलका देना


दिल तुम्हें दे दिया
सुकून तुम्हें दे दिया
ख़्वाबों में सिर्फ 
तुम्हें देखा
ख्यालों में सिर्फ 
तुम्हें रखा
निरंतर तुम्हारा 
इंतज़ार करता रहा
मेरी नज्मों के हर
लफ्ज़ को
तेरे नाम कर दिया
अब और क्या तोहफा
बचा तुम्हें देने के लिए
क्यों फिर
इतना तडपाते हो ?
बेदर्दी से ठुकराते हो
मन फिर भी नहीं भरा
तो जान भी दे दूंगा
एक वादा ज़रूर लूंगा
मेरे मरने के बाद
दुनिया को दिखाने
के लिए ही सही
मेरी कब्र पर
दो फूल चढ़ा देना
झूठे ही सही दो आँसू
ढलका देना
मेरी रूह को सुकून
दे देना
05-10-2011
1615-23-10-11
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

शायरी,

गुरुवार, 6 अक्तूबर 2011

झुंझला रहा हूँ


अकेला हूँ
इसलिए झुंझला
 रहा हूँ
यादों के सहारे वक़्त
काट रहा हूँ
अपनी गुस्ताख़ियों पर
आँसूं बहा रहा हूँ
पुरानी चोटों को
सहला रहा हूँ
दिल के
बुझे हुए दिए को
जलाने की कोशिश में
निरंतर सहारा ढूंढ
रहा हूँ
05-10-2011
1614-22-10-11

यादों के सहारे


अपनी
यादों के सहारे ,
तेरी तस्वीर बना
रहा हूँ
लाख कोशिशों के
बाद भी
चंद लकीरों से आगे
नहीं बढ़ पा रहा हूँ
ये मेरा भ्रम तो नहीं
ख़्वाबों में
तुझे देखा ही नहीं
तुमने कभी मेरी तरफ
रुख करा ही नहीं
दिल में छुपा दर्द
मिटाने को
निरंतर दिन में भी
ख्वाब देख रहा हूँ
05-10-2011
1613-21-10-11

ना जाने कैसी आँख मिचोली खेलते हैं


झलक दिखलाते हैं
आँखें उठा कर देखूं 
तब तक गुम हो जाते हैं
फिर इंतज़ार कराते हैं
रात भर जगाते हैं
सवेरे उठते ही पैगाम
भिजवाते हैं
तवज्जो ना देने का
उल्हाना देते हैं
निरंतर हैरान होते हैं
या हैरान करते हैं
कभी नहीं बताते हैं
ना जाने
कैसी आँख मिचोली
खेलते हैं
05-10-2011
1612-20-10-11

तमन्ना थी इक कंधा ढूँढ लूं


तमन्ना थी
इक कंधा ढूँढ लूं
ग़मों को हल्का कर लूं
इत्मीनान से
दिल की बात कह दूं
मुंह खोलता उस से
पहले ही ज़माने को
खबर हो गयी
रंजिश रखने वालों के
दिलों में आग लग गयी
पाक रिश्ते को
इश्क का नाम दे दिया
सारे शहर में बदनाम
कर दिया
ग़मों का बोझ बढ़ा दिया
 बेसहारे का अकेला 
सहारा भी छीन लिया
05-10-2011
1611-19-10-11

बुधवार, 5 अक्तूबर 2011

तकदीर नहीं बदलती


लाख नज़रें लड़ाओ
दिल 
कितना भी बहलाओ
तकदीर नहीं बदलती
लिखी है किस्मत में
गर मुफलिसी
झोली हमेशा खाली
रहती
दीवानों की दीवानगी
फिर भी ख़त्म
नहीं होती
हर लम्हा कोशिश
जारी रहती
डा.राजेंद्र तेला, निरंतर,
05-10-2011
1613-21-10-11

भावनाओं में



क्यों हम
भावनाओं में
निरंतर बहते जाते
तेज़ गति से आगे
बढ़ते जाते
कभी नहीं सोचते
जो हमारे लिए
आवश्यक
किसी और का
दर्द होता
स्वयं की इच्छाओं को
पूरा करने में
कुंठित हो जाते
ध्यान भी नहीं आता
किसी को
अच्छा नहीं लगेगा
ह्रदय उसका
पीड़ा से रोयेगा
क्यों ठहर कर अपने
आस पास नहीं देखते
लोगों को
साथ नहीं लेते
अपने
स्वार्थ के आगे अंधे
हो जाते
मन की शांती खोते
जीवन भर रोते रहते
परमात्मा के घर से
दूर शैतान के यहाँ
बसते
बिना सोचे समझे
निरंतर भावनाओं में
बहते रहते
04-10-2011
1610-18-10-11

आप बात ना करें मंज़ूर हमें


आप

बात ना करें
मंज़ूर हमें
आप
इंतज़ार कराएँ
शिकायत नहीं हमें
आप जवाब ना दें
गिला नहीं हमें
आपको
निरंतर अहसास
हमारा
काफी है दिल के
सुकून के लिए
04-10-2011
1609-17-10-11

मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

दिल की नादानियाँ


हर दिल वाला
दिल की 
नादानियाँ
जानता
निरंतर दिल के
कौने में छुपाकर
रखता
अकेले में याद कर
कभी मुस्काराता
कभी शरमाता
कभी व्याकुल हो कर
भूलना चाहता
दिल तो
आखिर दिल है
कब कहना
किसी का मानता
कह कर मन को 
तसल्ली देता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
04-10-2011
1608-16-10-11

क्यूं नफरत को गले लगाया ?


जब भी किसी ने
हम पर कोई
इलज़ाम लगाया
झूठे ही सही
सर झुका कर हमने
उसे कबूल किया
लोगों ने नाजायज़
फायदा उठाया
इलज़ाम लगाना
उनकी आदत में
शुमार हो गया
परेशाँ हमने भी
उनके चेहरे से
नकाब उठा दिया
नफरत का जवाब
नफरत से दिया
सुकून दोनों का
छिन गया
ना मुझे कुछ मिला
ना उसे कुछ मिला 
ना वो कभी सो पाया
ना मैं सो पाया
अब दोनों साथ बैठे
निरंतर रोते हैं
एक दूसरे से पूछते हैं
क्यूं नफरत को
गले लगाया ?
04-10-2011
1607-15-10-11

उनकी चंद बातों ने......

उनकी चंद बातों ने
सब्र रखने की सलाह ने
दिल-ओ-दिमाग
पर असर किया
यूँ लगा बेघर को घर
बेसहारा को सहारा 
ज़िन्दगी में छा रहे
अँधेरे को उजाला 
बदहवास मन का
हिम्मत होंसला बढ़ा
जीने का 
नया ज़ज्बा मिला
किस्मत में आशाओं का
नया चाँद उगा
जीवन सदा 
इक सार नहीं रहता
सुख,दुःख 
जीवन का हिस्सा
समझने का मौक़ा 
कुछ कर गुजरने का
फिर से हँसने का
रास्ता मिला
डा.राजेंद्र तेला, निरंतर,
04-10-2011
1606-14-10-11