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शनिवार, 1 अक्तूबर 2011

जब भी कोई नया मिलता

जब भी
कोई नया मिलता
बहुत कम दिल
को भाता
जो भी दिल को भाता
मन को भी लुभाता
अपनेपन का अहसास
कराता
जहन में अजीब सा
ज़लज़ला मचता
फिर मिलने की चाहत
बढाता
दिल से दिल
मन से मन मिले
ना भूले कभी
ना बिछड़े कभी
मन निरंतर नज़दीकी
चाहता
परमात्मा से दुआ
उसकी खुशी और
सलामती की करता
रोज़ उसका इंतज़ार
रहता  
01-10-2011
1595-04-10-11

कहाँ से कहाँ पहुँच गए हम

कभी लोग हमें  देखते थे
अब हम लोगों को देखते हैं 
प्यासों की प्यास बुझाते बुझाते 
कहाँ से कहाँ  पहुँच गए हम
  प्यासे रह गए हम 
निरंतर दिल देते गए
बेवफायी से हार गए हम
मोहब्बत के नाम से
अब घबराते हैं हम
वफ़ा की तलाश में 
भटक रहे हैं हम
परायों को अपना
बनाने की
कोशिश कर रहे हैं हम
मन से मन मिलाने को
तरस रहे हैं हम
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
01-10-2011
1594-03-10-11

पहली बार मिले

पहली बार मिले
रंग बिरंगे
सपने उड़ान भरने लगे
मन के सूने आकाश में
परिंदे फडफडाने लगे
ह्रदय में प्रेम संगीत के
नए सुर सजने लगे
संबंधों को विचारों से
आगे बढाने लगे
हवाई किले बनाने से
पहले
उनसे भी तो पूछ लो
वो क्या चाहते हैं ?
निरंतर ,मुस्काराने को
प्रेम क्यों समझते हो
01-10-2011
1593-02-10-11

वाह रे,पेंसिल

मानव जीवन की   
महत्वपूर्ण देन है तूँ  
जन्म से अब तक
निरंतर चल रही है तूँ
इंसान के हाथों में
खेल रही है तूँ
ना थकती,ना रुकती
विचारों को कागज़ पर
उकेरती है तूँ
अच्छी,बुरी बातें
लिखती है तूँ
राजा से रंक तक
बिना भेद भाव के
काम आती है तूँ 
बार बार छीली जाती 
फिर भी  क्रंदन नहीं
करती है तूँ
जीवन के आखिरी
पड़ाव पर दुत्कारी
जाती है तूँ
फिर भी चुप रहती है तूँ
सब्र और हिम्मत से
बहुत कुछ सहती है तूँ
कभी लेती नहीं ,
सदा देती है तूँ
ह्रदय से नमन तुझ को
मनुष्य को अमूल्य
सीख देती है तूँ
मानव जीवन के लिए
वरदान है तूँ
01-10-2011
1592-01-10-11

शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

चैटिंग का स्टिंग ऑप्रेशन (हास्य कविता)


हँसमुखजी
चैटिंग के किस्से सुन कर
फिर से
इश्किया मूड में आ गए
६० की उम्र में २५ का
दिखने की चाहत में
ब्यूटी पार्लर जा कर
ज़र्ज़र चेहरे का जीर्णोद्धार
करवा आये
नया विग लगवाया
स्टूडियो में नया फोटो
खिचवाया
फिर उत्साह से इन्टरनेट
पर लगा दिया
पहले ही दिन एक कन्या का
प्रस्ताव आया
घंटों बतियाने लगे
हंसी मज़ाक ,दिल की बातों
का आदान प्रदान होने लगा
भावावेश में
हँसमुखजी ने कन्या को
विवाह का प्रस्ताव दे दिया
कन्या बिफर गयी
फ़ौरन बोली हँसमुखजी मैंने
आपको पहचान लिया
आपके मकान से
आंठ्वे मकान में रहती हूँ
उसी ब्यूटी पार्लर में
काम करती हूँ
जहाँ आपने पुरानी
इमारत का
रंग रोशन करवाया
मैं उस दिन ही समझ गयी थी
दाल में कुछ काला है
इसीलिए आप की चैटिंग का
स्टिंग ऑप्रेशन कर डाला
अब मान जाओ
मुझे छोटी बहन समझ कर
राखी बंध वालो
नहीं तो ज़र्ज़र इमारत को
ध्वस्त कर दूंगी
खंडहर को भाई की अर्थी
समझ लूंगी
किसी टूटे खम्बे को ही
राखी बाँध दूंगी
आपको बहन के प्यार से
नवाजूंगी
30-09-2011
1591-162-09-11

खुदा की अजीब नियामत हो गयी

खुदा की अजीब
नियामत हो गयी 
अब ग़मों से
दोस्ती हो गयी
मेरी हसरतें ही
मेरी दुश्मन बन गयी
ज़िन्दगी की नाव
भँवर में फस गयी
खुशी अब ख्वाब
हो गयी
दुआ,हया बन गयी
निरंतर रोने का
सबब बन गयी
30-09-2011
1590-161-09-11

उनका अकस्मात चुप हो जाना

उनका
अकस्मात चुप
हो जाना
मन में प्रश्न खड़े
कर रहा
क्या त्रुटि हुयी मुझ से
मन स्वयं से पूछ रहा
ह्रदय पीड़ा से व्यथित
हो रहा
क्या किसी बात ने
अनजाने में 
उनके ह्रदय को ठेस
पहुँचायी
क्या मर्यादाओं का
उलंघन हुआ ?
क्या समस्याओं में
घिर गए ?
निरंतर प्रश्नों का
उत्तर खोज रहा हूँ
परमात्मा से
प्रार्थना कर रहा हूँ
उनकी
समस्याएं सुलझा दे
मन में पल रहे प्रश्नों का
समाधान करे
मुझे चिंता मुक्त करे
उनकी झोली
खुशियों से भर दे
उन्हें 
आनंद प्रदान करे
30-09-2011
1589-160-09-11

दिल में रखता हूँ

मैं आकाश नहीं हूँ 
जो सारे जहां को
अपनी बाहों में समेट लूं
समुद्र भी नहीं हूँ पानी
में नयी दुनिया बसा लूं
बड़े दिल का छोटा
इंसान हूँ
ना रंजिश
ना नफरत किसी से
दिल का दरवाज़ा
निरंतर खुला रखता हूँ
जो भी प्यार से आ जाए
जब तक चाहे
दिल में रखता हूँ 
30-09-2011
1588-159-09-11

ज़िन्दगी बहुत गुजार ली दर्द दिल में लिए

ज़िन्दगी
बहुत गुजार ली
दर्द दिल में लिए
कोई सहारा मिले
बात मन की सुन ले
दिल में बरसों से
चुभ रही फास को
निकाल दे
निरंतर उस चेहरे को
ढूंढता रहा  
चेहरे पर हँसी लाये
उजड़े हुए गुलशन में
फिर से बहार लाए
माली की
तलाश में निरंतर
भटक रहा हूँ
मायूस हो गया हूँ
मगर
उम्मीद नहीं छोडी 
यकीन मुझे खुदा पर
कभी तो ग़मों से
राहत मिलेगी
लबों पर मुस्कान
होगी
30-09-2011
1587-158-09-11

कोई पराया अपना हुआ

आज
नया रिश्ता बना
कोई पराया अपना
हुआ
दिल की बातों को
उसने
बड़े सब्र से सुना
मेरे दर्द को समझा
बातों से दिलासा
रोने को कंधा दिया
मन हल्का हुआ
निरंतर बुझे चेहरे पर
सुकून का आगाज़ हुआ
हालात से लड़ने का
नया होंसला मिला
मन में छिपे दुखों को
विराम मिला
रिश्तों पर यकीन
कायम हुआ
इंसानियत ज़िंदा है
आज अहसास हुआ
आज
नया रिश्ता बना
कोई पराया अपना
हुआ
30-09-2011
1586-157-,09-11