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शनिवार, 10 सितंबर 2011

जीवन खेल का मैदान ,जीना एक खेल है

जीवन खेल का
मैदान
जीना एक खेल है
हर जीत का सवाल
कहाँ ?
जो जैसा खेलेगा
नतीजा वैसा होगा
बेईमानी से खेलोगे
दूसरे खिलाड़ी को
टांग अड़ा कर
गिराओगे
एक दिन तुम भी
गिर जाओगे
खेल भावना से खेलोगे
सब को भाओगे
कोई ज़ल्दी थकेगा
खेल बीच में छोड़ेगा
कोई अंत तक खेलेगा
हार ना मानेगा
जी जान लड़ा देगा
निरंतर जीवन को
खेल समझेगा
आनंद और खुशी से
जीवन जियेगा
जीवन खेल का मैदान
जीना एक खेल है
10-09-2011
1481-53--09-11

नेता मालामाल को कंगाल कर जाते हैं (हास्य कविता)



 निरंतर हंसने वाले
हँसमुखजी कौने में बैठ कर
आंसू बहा रहे थे
उनसे इस तरह रोने का
कारण पूछा
थोड़ी ना नकुर के बाद
वो कहने लगे
मेरे एकलौते कमाऊँ पुत्र को
एक घाघ नेता की लडकी ने
अपने जाल में फंसा लिया है
दोनों ने शादी का
निर्णय भी कर लिया  है
पहले तो सोचता था
पुत्र की शादी में ढेर सारा
दहेज़ मिलेगा
घर और ज्यादा संपन्न होगा
पर अब खुद के माल को
बचाने के लाले पड रहे हैं
नेता मालामाल को
कंगाल कर जाते हैं
देश का माल डकार जाते हैं 
सगे भाई को नहीं छोड़ते  हैं
मेरा माल क्या छोड़ेंगे
इस डर से घबरा रहा हूँ
10-09-2011
1480-52--09-11

हम खुशी में मदहोश हो गए

हम उनके हुस्न के
कायल थे  
उनके दीदार को
तरसते थे
दिल से उन्हें चाहते थे 
निरंतर बेचैनी से 
इंतज़ार करते थे
वो नज़र भी आये
हमें देख कर मुस्काराए
हम खुशी में मदहोश
हो गए
होश में आये तब तक
वो आगे बढ़ गए
अरमानों को अधूरा
रख गए
हम अकेले थे अकेले
रह गए 
10-09-2011
1479-51--09-11

सायों को अपना समझ बैठा था

बहुत उम्मीद से
उसे ख़त लिखा
चुनिन्दा लफ़्ज़ों से
उसे सजाया
जज़्बातों का
अम्बार लगाया
बहुत शिद्दत से
इंतज़ार किया
मगर उसका
जवाब नहीं आया
उसकी बेरुखी ने
दिल तोड़ दिया
मगर हकीकत से
वाकिफ कराया
बहती हवाओं को
थामने चला था
सायों को अपना
समझ बैठा था
मुस्काराहट को
मोहब्बत
मान बैठा था
ख़्वाबों को मंजिल
समझ लिया था
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
10-09-2011
1478-50--09-11
जीवन ,जीवन मन्त्र ,मोहब्बत,ख्वाब,

ज़िन्दगी चैन से रहने ना देती

हँसो या रोओ
ज़िन्दगी निरंतर
चलती रहती है
किसी को
मोहलत नहीं देती
साथी 
पीछे छूटते जाते
नए साथी मिलते
जाते
हसीन लम्हे
आँखों से
फिसलते जाते
दुखों  के पहाड़
आते रहते
ज़िन्दगी चैन से
रहने ना देती
निरंतर नए जलवे
दिखाती
उम्मीद फिर भी
बनी रहती
ज़िन्दगी यूँ ही
चलती रहती
10-09-2011
1477-49--09-11

कोई तो लम्बी दूर तक साथ चले

कोई तो
लम्बी दूर तक
साथ चले
मेरी बात समझ ले
मेरे दिल में
झाँक कर देख ले
निरंतर
मेरा इंतज़ार करे
दिल से
स्वीकार कर ले
मुझे अपना
समझ ले
10-09-2011
1476-48--09-11