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शनिवार, 3 सितंबर 2011

अलफ़ाज़ क्या नहीं करते

अलफ़ाज़
क्या नहीं करते
दिलों में आग
लगा देते
नफरत को प्यार में
बदल देते
ख्यालों को बाहर लाते
मन की पीड़ा कम
करते
दिलों को तोड़ते
दिलों को जोड़ते
निरंतर
सवाल खड़े करते
जवाब भी
अलफ़ाज़ ही देते
अलफ़ाज़
क्या नहीं करते
03-09-2011
1439-14-09-11

पुराने यार याद आ गए

पुराने यार
याद आ गए
यादों के 
घोंसले बस गए
जहन में 
हंसी ठहाके गूँज गए
कानों में लफ्ज़
सुनायी पड़ने लगे
दिल में राहत के
बादल बरसने लगे
टूटे हुए धागे फिर
जुड़ने लगे
रोते ख्याल
मुस्कराने लगे
खुशनुमा दिन वापस
आने लगे
जो ज़िंदा नहीं अब
लौटने लगे
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-09-2011
1437-12-09-11

हास्य कविता -अगले चुनाव में यमराज शत प्रतिशत बाहर है

हँसमुखजी पत्रकार थे
नरक की यात्रा में
साक्षात्कार करने के लिए
लोगों को ढूँढने लगे
उनकी मुलाक़ात एक पुराने
मशहूर नेताजी से हुयी
उन्होंने सवालों की बौछार कर दी
नरक में कैसा लगता है ?
रिश्तेदारों की याद सताती होगी ?
काम भी करना पड़ता होगा
खाने पीने को भी
बहुत कम मिलता होगा
यमराज की मार भी खानी
पड़ती होगी
नेताजी ने हँसते हुए जवाब दिया
मैं यहाँ बहुत आराम से हूँ
सारे नेता  और रिश्तेदार भी
यहीं रहते हैं
धरती पर अलग अलग पार्टी में थे
यहाँ एक ही पार्टी है
जिसका नाम नेता पार्टी है
यमराज भी हमसे डरता है
हमारी बात नहीं मानता है तो
हम यहाँ भी
हड़ताल और बंद करते रहते हैं
नरक का सारा काम
ठप्प कर देते हैं 
यूं समझो सत्ता हमारे पास है
यमराज के ख़ास लोगों को
रिश्वत और सुरा सुन्दरी का
स्वाद चखा दिया है 
अगले चुनाव में
यमराज शत प्रतिशत बाहर है
और तो और हमें
बेईमान कहने वाला भी
कोई नहीं है
क्यों की सारे के सारे निवासी
अब बेईमान हैं
यहाँ से पैसा कमा कर
निरंतर स्वर्ग के बैंकों में
ज़मा करते हैं  
मौक़ा मिलते ही वहाँ भी
सत्ता पलट देंगे
पाताल से लेकर आकाश तक
हम ही राज़ करेंगे
02-09-2011
1436-11-09-11

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

हास्य कविता--हूर के साथ लंगूर मत बाँधना

हँसमुखजी बेटे को
कहानी सुना रहे थे
एक सीधी सादी सुन्दर
महिला थी
उसकी शादी एक
जाहिल और गंवार
आदमी से हो गयी
जो ना देखने में सुन्दर था
ना ही कोई काम करता था
निरंतर हुक्म चलाता था
बच्चा रोने लगा
हँसमुखजी ने रोने का
कारण पूछा
बच्चे ने जवाब दिया
मुझे बच्चा समझ कर
बेवकूफ बना रहे हो
कहानी की जगह
हकीकत बता रहे हो
मम्मी आप के बारे में
ऐसा ही कहती है
उनकी किस्मत फूट गयी
ये भी बोलती है
रोज़ भगवान् से प्रार्थना
करती है
ऐसा पती किसी
दुश्मन को भी नहीं देना
चाहे कुंवारा रख देना 
हूर के साथ लंगूर
मत बाँधना
02-09-2011
1435-10-09-11

जिसने जीत लिया स्वार्थ को

ग्रंथों को पढ़ लो
इतिहास को देख लो
ज्ञानी में ढूंढ लो
अज्ञानी में देख लो
छोटे बड़े में खोज लो
स्वार्थ मनुष्य के
स्वभाव का
अभिन्न अंग है 
जिसने जीत लिया
स्वार्थ को वो ईश्वर का
सामीप्य पाता
जिसे जीत लिया स्वार्थ ने
वो ईश्वर से दूर रह जाता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
02-09-2011
1434-09-09-11

हंसमुख जी को पालतू बकरी से प्रेम हो गया (हास्य कविता )





  हंसमुख जी को पालतू
बकरी से  प्रेम हो गया


बकरी को रोज़
अपने हाथों से नहलाते
बालों को शैम्पू करते
आँखों में काजल
होठों पर लिपस्टिक लगाते
उसे गहने पहनाते
पत्नी को बर्दाश्त नहीं हुआ
चिढ कर कहने लगी
कभी मेरा भी
इसके जैसा श्रृंगार करो
क्या मुझसे प्यार नहीं करते ?
हंसमुखजी मिमियाते हुए बोले
श्रृंगार तो कर सकता हूँ
पर मुझे पूरा यकीन है 
श्रृंगार के बाद  भी तुम
 जैसी हो उससे भी बदसूरत लगोगी
बकरी तो दूर की बात
किसी गाय  से कम नहीं दिखोगी
बकरी तो श्रृंगार के बाद
और सुन्दर दिखती है
मुझे उसमें किसी अभिनेत्री की
 झलक दिखती है
कुछ पल आँखों को
राहत मिल जाए
ऐसा काम कर दिया है 
मैंने बकरी का नाम भी बदल कर
तुम्हारे नाम पर रख दिया है
पत्नी भी कम नहीं थी
उसने गुलाम पर बेगम मारी 
खीज कर बोली
तुम भी किसी बकरे से
कम नहीं दिखते
मेरे सामने तो मिमियाते हो
बकरी के नखरे उठाते हो
जात वालों से प्रेम जताते हो
आज समझ आया
क्यों बकरी को इतना चाहते हो
आज से खाने में चारा मिलेगा
चरने  के लिए जंगल जाना पडेगा
घर लौट कर आये तो
खूंटे से बाँधना पडेगा 
02-09-2011
1433-08-09-11