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शनिवार, 30 जुलाई 2011

जीने की हसरत अभी बाकी थी


दिन भर की मेहनत से
थका मांदा बीमार
वृद्ध मजदूर
पेड़ के नीचे बैठा
चिंता में डूबा था
उसके बाद परिवार का
क्या होगा ?
अपाहिज बेटी,
अंधी पत्नी का
जीवन कैसे कटेगा ?
चेहरा चिंता को
स्पष्ट बयान कर रहा था
ज़िन्दगी की धूप में बहुत
झुलसा
थोड़ा और झुलसना
चाहता
अब शाम के धुंधलके में
काली रात का डर
लग रहा
दिल में जीने की हसरत
अभी बाकी थी
यादों के झरोके से
थोड़ी सी धूप चुरा ले
फिर से जवान हो जाए
रात का फासला
थोड़ा सा और बढ़ जाए
किसी तरह परमात्मा
जीवन के
कुछ साल और बढ़ा दे
1272-156-07-11

क्यूं शराब पीकर मदहोश होता ?

क्यूं शराब पीकर

मदहोश होता ?

लम्हा लम्हा उसे

याद करता

ग़मों को भूलने की

कोशिश करता

कामयाब अभी तक

हुआ नहीं

ना गम भूला ना

उसको भूला

हकीकत से वाकिफ

हो जा

जाने वाला लौट कर

आता नहीं

क्यूं ना उसको ही

भूल जाता ?

निरंतर जिसके खातिर

जाम भर भर पीता

मयखाना आबाद

करता

रोज़ रो रो कर

मरता

उसकी रूह को भी

दुखी करता

30-07-2011

1270-154-07-11

वो कद्रदां हमारे बड़ी दूर से आते

वो कद्रदां हमारे

बड़ी दूर से आते

हमारे लिए पैगाम

विश्वाश का लाते

यकीन हम पर क़िया

होंसला हमारा बढाया

बेहतर करने के ज़ज्बे से

निरंतर हमें नवाज़ा

चाहने वालों ने ही हमें

रास्ते पर चलाया

लालच और अहम् को

पास फटकने ना दिया

शुक्रिया उनका दिल से

किसी लायक हमें

समझा

आज इस मुकाम तक

पहुंचाया

30-07-2011

1269-153-07-11

(एक चिकित्सक होने के नाते,ह्रदय से उन मरीजों को मेरा नमन

जो दूर दराज से आते हैं ,होंसला,हिम्मत बढाते हैं ,

उनके द्वारा दिखाए विश्वाश को प्रणाम करता हूँ ,

जो भी हूँ आज उनकी वजह से हूँ )

आज तुम से ही पूंछ लूं


आज 
तुम से ही पूंछ लूं
सच कह कर
नाराज़ करूँ
या 
झूठ बोल कर,
खुश करूँ ?
निरंतर सवालों में
जकड़ा हूँ
अहम् बढ़ाऊँ
या 
कम करूँ ?
सच्चा मित्र
बन कर रहूँ
या 
दिखावा करूँ ?
सब जीते हैं 
जैसे
मैं भी वैसे ही जीऊँ ?
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
30-07-2011
1267-151-07-11
सच,झूठ,जीवन,ज़िंदगी