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शनिवार, 23 जुलाई 2011

चेहरे से मुस्कान हटती नहीं

याद उनकी निरंतर

सताती

वो हैं की लौटती नहीं

उम्मीद कम होती नहीं

जान भी निकलती नहीं

रोने की

मुझे आदत नहीं

चेहरे से

मुस्कान हटती नहीं

दुनिया समझती

मुझे कोई गम नहीं

उनसे जुदायी

मौत से कम नहीं

फूल खिला ज़रूर पर

महक नहीं

सांसें चलती ज़रूर

पर जीने की

ख्वाइश नहीं

23-07-2011

1218-98-07-11

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

हसने वालों को भी कभी रोना होगा

कोई तो मेरा साथ दो

मेरे गम में आंसू बहाओ

मैं हंस रहा था

तब सब हंस रहे थे

अब क्यों मुंह छिपा रहे ?

मुझे पता नहीं था

दस्तूर ज़माने का निबाह रहे

हैरान हूँ

अब क्यों इंसान

इंसानियत नहीं निभाते

क्या रिश्ते

इतने कमज़ोर होते ?

कच्चे धागे से टूटते

ज़रुरत के हिसाब से चलते

वक़्त सदा

इकसार नहीं रहता

क्यूं लोग निरंतर भूलते ?

हसने वालों को भी कभी

रोना होगा

जीवन का हर रंग

देखना होगा

22-07-2011

1216-96-07-11

आज भी दिलों से खेल रहा था

बरसों बाद मिला था

किसी के साथ था

कैसे पूछता ?

साथ कौन था

अंदाज़ से समझ गया

नया आशिक था

देख कर मुस्कराया

यही क्या कम था

मैं उसे याद था

उसके अंदाज़ ने

निरंतर लुभाया

दिल में इक शोला

भड़काया

आज फिर दिल में

यादों का दिया

जलाया

मुझे बरसों पीछे

लौटाया

इक इक लम्हा याद

कराया

समझता था मुझे

भूल गया होगा

वक़्त के साथ

बदल गया होगा

ख्याल गलत था

वो अब भी

ज़ज्बातों का फायदा

उठा रहा था

आज भी दिलों से

खेल रहा था

22-07-2011

1215-95-07-11

मोहब्बत को बहता हुआ पानी समझ लिया

दर्द-ऐ-इश्क को

खुदा का फरमान

समझ

गले से लगा लिया

मोहब्बत को

बहता हुआ पानी

समझ लिया

जितना पी सका

पी लिया

जो बह गया उसे

उसे जाने दिया

अब निरंतर

रोना छोड़ दिया

गम में जीना

अब आदत बना लिया

काटी थी रातें जिसकी

याद में

उसे सपना समझ

भूल गया

22-07-2011

1214-94-07-11

ज़िन्दगी तमन्नाओं की बस्ती

ज़िन्दगी
तमन्नाओं की बस्ती
कभी हंसती,कभी रोती
धूप छाँव सी चलती
रहती
किस को सुकून
किस को बेचैनी रहेगी
खबर किसी को नहीं
होती
निरंतर उम्मीद में
कटती
हर आँख सपना देखती
एक टूटता
दूजे की तमन्ना होती,
ज़िन्दगी यूँ ही कटती
22-07-2011
1213-93-07-11

सोच से कोई नहीं जन्मा

सोच से
कोई नहीं जन्मा
हर जन्म
मिलन का नतीजा
कभी इच्छा,
कभी मजबूरी कारण
जब आ गया
संसार में
खुद भी वही करेगा
जो औरों ने किया
कभी मंजूरी से
कभी मजबूरी में
निरंतर

नए जीवन का
उदय करेगा
21-07-2011
1212-92-07-11

बुधवार, 20 जुलाई 2011

इससे बेहतर कोई किस्मत नहीं

मेरा चमन लुट गया
कोई गिला नहीं
किसी और का बस गया
ये भी कम बात नहीं
मेरी बर्बादी से 
किसी को खुशी
बहते अश्कों से
किसी को हंसी मिली
इस से बढ़ कर तो कोई
कामयाबी नहीं
निरंतर उन्हें
खुश रखने की हसरत
अब पूरी हुयी
इससे बेहतर कोई
किस्मत नहीं  
20-07-2011
1211-91-07-11

रोकर जियो या हंस कर जियो

रात बीती
ख़्वाबों की लड़ी टूटी
ख्यालों की बातें
दफ़न हो गयी
दर्द सारे दब गए
क्या आज करना है ?
याद रहा
जीने के लिए
पेट की आग को
बुझाना है
रोकर जियो या
हंस कर जियो
जब तक जान हैं
मजबूरी  है
जीने के लिए
सब कुछ भूलना है
निरंतर काम तो
करना है
20-07-2011
1210-90-07-11

क्यों उसे नारी बनाया ?

वो कौने में बैठी 
आज फिर
सिसकियाँ ले कर
रो रही थी
कई बार अस्मत
लुटा चुकी थी
हवस के शिकारियों से
नुच चुकी थी
आने जाने वालों को
उसकी फ़िक्र ना थी
उसे देख कर निकल
जाना
उनकी इंसानियत 
बयाँ करती 
मनचलों के लिए
निरंतर
खेल की चीज़ थी
भद्दी गालियाँ
फिकरे सुनना उसकी
किस्मत थी
वो एक एक मजबूर
भिखारन थी
वक़्त की मारी हुयी
खुदा की औलाद थी
उसकी आँखों के सामने
पेट के खातिर
बार बार मरती थी
क्यों उसे नारी बनाया ?
रोज़ खुदा से पूछती
20-07-2011
1209-89-07-11

पराग का मिठास निरंतर लुभाता

 पराग का मिठास
निरंतर लुभाता
हर जुबान को
लपलपाता
जितना मीठा
दिखता
उतना है या नहीं
चखने वाला ही
जानता
बावक्त कड़वा
निकलता
आँखों में आँसू
लाता
जीवन की
हकीकत
दर्शाता
20-07-2011
1208-88-07-11

मंगलवार, 19 जुलाई 2011

अंदाज़ बड़ा नटखट तुम्हारा

अंदाज़ बड़ा
नटखट  तुम्हारा 
निरंतर  मुझे लुभाता   
जितना  दूर  जाता
उतना  पास  बुलाता
दिल के सन्नाटे को
अपनी सदा से
तोड़ता
दिल तुम को दे दूं
बार बार कहता
19-07-2011
1207-87-07-11
(सदा =आवाज़)