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शनिवार, 2 जुलाई 2011

रात भर सोया ना था


रात भर
सोया ना था
उसकी जुदायी के
गम में रो रहा था 
आँखों से सब
पता चल रहा था
निरंतर छुपाने की
कोशिश में
मुंह चुरा रहा था
हाल-ऐ-दिल
खुद-बी-खुद बयाँ
कर रहा था
02-07-2011
1128-12-07-11

अहसास ना था

आग बरसाते
सूरज की गर्मी में भी
कई आँखें उसका
इंतज़ार करती
वो बेखबर
तेज़ धूप में भी
ठंडक पहुंचाती
निरंतर इठलाती
बल खाती
चलती रहती
दुपट्टा जब
आँचल से सरक
गया
बहुतों के मुंह से
एक साथ निकली
आह को सुना
तब तक उसे
अपनी ख़ूबसूरती का
अहसास ना था
02-07-2011
1127-11-07-11

ज़माने से बेखबर तुम में डूबा हुआ था

ख़्वाबों का
सिलसिला टूट गया
तुम मुझे
मैं तुम्हें
देख रहा था
 तुम्हारा हाथ 
मेरे हाथ में था
ज़माने से बेखबर
तुम में डूबा
हुआ था
बस इतना सा
याद रहा
02-07-2011
1126-10-07-11

महताब सा चेहरा जहन में रखता हूँ

शराब नहीं पीता हूँ
फिर भी हर वक़्त
नशे में रहता हूँ
उनके इश्क में
बहकता हूँ
खुद को भूल कर
सिर्फ उनका 
महताब सा चेहरा
जहन में रखता हूँ
दिल अब ऐसे ही
बहलाता हूँ
02-07-2011
1125-09-07-11
(महताब=Moon )
डा,राजेंद्र तेला,निरंतर,
शायरी,मोहब्बत,महताब ,इश्क 

अब दर्द भी बेवफा हो गया

वो लाख सता लें
लाख तड़पा लें
हज़ार तोहमतें लगा लें
जी भर के बहाने बना लें
ना आँखों से 
कोई अश्क गिरता
ना दिल में दर्द होता
अब दर्द भी 
बेवफा हो गया
वो भी जान गया
उनकी मोहब्बत में
अंधा हो गया था 
उनका हर हरकत में
मोहब्बत का नया
अंदाज़ नज़र आता था 
मेरी चाहत में
इजाफा होता रहता था 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
मोहब्बत,शायरी,
02-07-2011
1124-08-07-11
(इजाफा=बढना)

मेरी इल्तजा पर गौर तो फरमाना

मेरी इल्तजा पर
गौर तो फरमाना 
मेरी मोहब्बत का
जवाब तो देना
इक बार तो आ जाना
प्यासे की प्यासा
मिटा देना
दिल ना लगे
तो लौट कर चले जाना
ये वादा रहा हमारा
हर ख्याल रखेंगे
तुम्हारा
निरंतर दिल-ओ-जान
लुटा देंगे तुम पर
हर सूरत में खुद को
बनायेंगे तुम्हारा
02-07-2011
1123-07-07-11

काव्यात्मक लघु कथा -भ्रात्र -प्रेम

काव्यात्मक लघु कथा -भ्रात्र -प्रेम
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पिता को 
समझ नहीं
आ रहा था
खुशी से हँसे 
या दुःख में रोये
एक पुत्र इम्तहान में
अव्वल आया
दूसरा फेल हो गया
जिस की तरफ ध्यान
ज्यादा था
जो खुद का अपना था
वह असफल हो गया
जो गोद आया था
उसका अपना खून
ना था
वह सफल हो गया
ह्रदय व्यथित भी था
खुश भी था
एक को फिर से पढ़ना
पडेगा
निरंतर हीन भावना से
ग्रसित रहेगा
दूसरा अफसर बनेगा
भाइयों में मनभेद ना हो
उसके लिए क्या करे ?
सवाल से परेशान था
तभी गोद आया पुत्र
पिता के पास आकर
कहने लगा
आप की व्यथा समझता हूँ
भाई की असफलता
मेरी भी असफलता है
आज से पढ़ाने का
जिम्मा मेरा है
ना हीन भावना से
ग्रसित होने दूंगा
ना हिम्मत खोने दूंगा
उसकी सफलता में
मेरी भी सफलता है
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 



02-07-2011
1122-06-07-11