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शनिवार, 18 जून 2011

पहला प्यार


पहली बार
 जिस को चाहा
जुदा होने के बाद भी
ख्याल उसका  ही आता
निरंतर
सवाल खुद से  करता हूँ
क्या गुनाह किया ?
जो जुदा उससे हुआ
लाख दिल को समझाता हूँ
क्यों उसे नहीं भूलता हूँ ?
फिर खुद ही जवाब देता हूँ
शायद दिल का सौदा
बार बार नहीं होता
मन भले ही लगा लो
चाहे वक़्त भी गुजार लो
साथ हंसलो साथ गा लो
कोशिश कितनी भी
कर लो   
जो बस गया दिल में
इक बार
फिर नहीं निकलता
दबे पाँव
ख्यालों ख़्वाबों में
आता रहता
पहले प्यार जैसा प्यार
दोबारा नहीं होता
पहला प्यार ही असली
प्यार होता
18-06-2011
1070-97-06-11

निरंतर सच की तलाश में रहता हूँ

मेरा सच अन्दर 
छुपा है
किसी को पता नहीं 
अन्दर क्या है ?
जो दिखता है 
वो सच कहाँ है ?
ना आइना सच बतात़ा
ना जुबां से सच कहता
मुखोटा चेहरे पर 
लगाए घूमता
हंसता हूँ ,रोता हूँ
सच बहुत ख़ूबसूरती से
 छुपाता हूँ
हकीकत में मुझे भी 
पता नहीं
सच क्या होता
जो मन को भाये 
वो सच होता या
जो सब कह दें 
वो सच होता
निरंतर सच की 
तलाश में रहता हूँ
ज़िन्दगी यूँ ही जीता हूँ
18-06-2011
1069-96-06-11

कैसे लोग राज कर रहे ?

आज के हालात से
चिंतित  हूँ
रोज़ हो रहे कत्लों से
व्यथित हूँ
कैसे लोग राज कर रहे ?
अचंभित हूँ
निरंतर खुदा से दुआ
करता हूँ
कातिलों को सदबुद्धी दे
जिन्हें मारना चाहिए
उन्हें छोड़ देते
जिन्हें छोड़ना चाहिए
उन्हें मार देते
जिन्हें जेल में होना
चाहिए
वो राज कर रहे
जिन्हें राज करना
चाहिए
वो बाहर बैठे कर
देश की हालत से
दुखी हो रहे
विधि के विधान पर
विचारों का मंथन
कर रहे
18-06-2011
1068-95-06-11

बात इमानदारी की कीजिये ,रिश्वत का माल जेब में रखिये

बात इमानदारी की  कीजिये
रिश्वत का माल जेब में रखिये
लोगों से गले मिलते  रहिये
मन में भरपूर गाली दीजिये
दिखाने को मुस्काराते रहिये
दिल ही दिल में  रोते रहिये
मुंह  पर   तारीफ़   कीजिये
पीठ  पीछे बद्दुआएं दीजिये
खुदा  से  दुआ करते  रहिये
काम   हैवान  का  कीजिये
नफरत  से   जीते   रहिये
बात मोहब्बत की  कीजिये
काम निरंतर उलटे  कीजिये
दोष  ज़माने को देते रहिये
ज़माने  का दस्तूर निभाइये
सब करते,इसलिए आप भी 
कुछ वैसा ही करते रहिये
18-06-2011
1067-94-06-11

देश सेवा के नाम पर ,अंतिम क्षण तक, तन मन से घोटालों में लिप्त थे



वो अस्सी वर्ष के
मोटी चमड़ी वाले घाघ
नेता थे
बिना पद के थे
अवसाद में सख्त बीमार हुए
मौत के कगार पर पहुंचे
बचाने के सारे जतन
विफल हो गए
परमात्मा भी नहीं पिघले
अंतिम प्रयास में ,
एक अन्य नेता ने
उनके कान में कहा
आपको चुनाव का टिकट
मिल गया
नेताजी ने आँखें खोली
हल्की मुस्कान बिखेरी
थोड़े दिनों में स्वस्थ हो गए
चुनाव लड़े और जीत गए
मंत्री बने,कई घोटाले किये
जनता और कोर्ट के दबाव में
पद मुक्त हुए
परदे के पीछे से चालें
चलने लगे
चालों ने असर दिखाया
राज्य के गवर्नर नियुक्त हुए
राजनीती से बाज़ नहीं आये
रोज़ नए गुल खिलाने लगे
अखबारों की सुर्खी बने रहे
किसी तरह पांच वर्ष हुए
गवर्नरी से भी मुक्त हुए
मरते वक़्त भी
किसी आयोग के चेयरमैन थे
जनता के सच्चे सेवक थे
निरंतर 

 देश सेवा के नाम पर
अंतिम क्षण तक
तन मन से 
घोटालों में लिप्त थे
नए नेताओं के लिए
प्रेरणा स्त्रोत्र थे
18-06-2011
1066-93-06-11

शुक्रवार, 17 जून 2011

रोज़ कुछ नया लिखता हूँ , दर्द-ऐ-दिल मिटाता हूँ

  मुझे पुरस्कार नहीं
चाहिए
ना ही  कोई तमगा
चाहिए
जो लिखता हूँ पढ़ लो
जो सोचता हूँ , 
समझ लो
मंथन विचारों का 
कर लो
पसंद आये तो
लिख कर बता दो
ना पसंद आये तो
साफ़ साफ़ कह दो
जो चलता जहन में
निरंतर लिख कर 
बताता हूँ
हर बात साफ़ साफ़ 
कहता हूँ
किसी को नाराज़ करने की
मंशा नहीं
किसी को खुश करने की
चाहत नहीं
मुझे निरंतर लिखना है
रोज़ कुछ नया लिखता हूँ
दर्द-ऐ-दिल मिटाता हूँ
17-06-2011
1063-90-06-11

इंतज़ार क्या होता ,अहसास कर के तो देखो

ज़रा प्यार कर के
तो देखो
लुत्फ़ मोहब्बत का
उठा कर तो देखो
इंतज़ार क्या होता
अहसास कर के तो देखो
उम्मीद क्या होती 
दिल की गहराई में
उतर कर तो देखो
निरंतर ख़्वाबों की
दुनिया को देखो
ख्यालों को बंधते देखो
दिल को लुटते देखो
खुद को भूलते देखो
होश में बेहोश
हो कर तो देखो
ज़रा प्यार कर के
तो देखो
17-06-2011
1062-89-06-11