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शनिवार, 9 अप्रैल 2011

मेरी चाहत को गुनाह ना कहना


मेरी चाहत को
गुनाह ना कहना
तुम्हें खुदा माना
उसकी इबादत समझना
खुदा से दिल लगाना
गुनाह नहीं होता
फिर भी चाहो
तो सज़ा दे देना
खुशी से मंजूर कर लूंगा
इसी बहाने निरंतर
याद करोगे मुझ को
इसी में सुकून पा लूंगा
09-04-2011
635-68-04-11

E

दिल छोटे मकान बड़े हो गए हैं


आज कल दिल छोटे
मकान बड़े हो गए हैं
बड़े मकान के दरवाज़े
मगर छोटे रह गए हैं
मन में स्वार्थ के
घरोंदे बस गए हैं
इंसान इश्वर से दूर
स्वार्थ के पास हो गए हैं
सत्य से दूर
भ्रम में जीने लगे हैं
देना नहीं
केवल लेना चाहते हैं
खुद में सिमट गए हैं
अहम के दास बन गए हैं
हम और हमारे भूल गए हैं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
 
 09-04-2011
634-67-04-11

क्यों मुसकराए थे देख कर मुझे ?

क्यों मुसकराए थे देख कर मुझे ?
मिले थे दिल खोल
 कर मुझ से
खुद
   को   साया  मेरा  कहते थे
अब शक्ल भी देखना ना चाहते

जवाब
मेरे किसी खत का ना देते
गर
नफरत इतनी तुमको मुझ से
जी भर के सज़ा दे दो
मुझ को
इल्तजा इतनी सी है तुम
से
मेरा नाम अपने जहन से हटा दो
हर याद मेरी
दिल से निकाल दो
मेरा
 सुकून  मुझे  लौटा  दो
मेरी
 मुस्कान वापस  दे  दो
निरंतर नींद मेरी छीनी तुमने

वो नींद मुझे फिर से दे दो

जो सपने दिखाए
 थे मुझे तुमने
वो सपने मुझ
  से वापस ले लो
फिर चाहो सौगात में कफ़न दे
दो
जीते जी दफ़न मुझ को कर दो
09-04-2011
633-66-04-11

बहुत शिद्दत से इबादत की थी हमने

बहुत शिद्दत से
इबादत की थी हमने
मांगे थे
खुदा से हसीन सपने
लम्हा,लम्हा खुशी से
जी सकूं
मोहब्बत को मकसद
बना सकूं
ऐसा हमसफ़र दे दे
हमको
जवाब में  हमें रत जगे
मिले
अपनों के भेष में दुश्मन
मिले
मुस्काराते हुए कातिल
मिले
निरंतर दिल-ऐ-बेवफा
मिले
अब दरवाज़ा
खटखटा 
रहा हूँ
खुदा के घर का
जो दिया मुझे वो वापस
ले ले
बदले में गुजरा वक़्त
फिर से दे दे

09-04-2011
632-65-04-11
E

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

मुझे अपना अक्स बना लो तुम


अपना अक्स बना लो तुम
जब भी आइना देखोगे  
मुझे उस में देखोगे तुम
इंतज़ार ना करना होगा
दिल के पास पाओगे तुम
बात दिल की कहनी हो
चुपके से कह देना तुम
लोगों की नज़रों से बचोगे
किसी को पता ना चलेगा
किसी के हो गए हो तुम
हर हाय से बचोगे तुम
निरंतर खुश रहोगे तुम
08-04-2011
631-64-04-11

अन्ना हजारे मेरा नाम ,मुझे कमज़ोर ना समझना



नेता नहीं हूँ ,अफसर नहीं हूँ

फिर भी कमज़ोर ना समझना

पैसा नहीं,पिस्तोल नहीं

फिर भी कमज़ोर ना समझना

मेरा ईमान मेरे साथ,

देश भक्ती मेरे साथ 

देश की जनता मेरे साथ

मेरा जज्बा मेरे साथ

मुझे कमज़ोर ना समझना

डरता नहीं फितरत से उनकी 

अन्ना हजारे मेरा नाम

मुझे कमज़ोर ना समझना

08-04-2011

630-63-04-11

सच से दुनिया को रूबरू कराओगे तुम

कुछ वक़्त दिल से दिल लगाया तुमने
कुछ लम्हे ख्यालों में हमें दिए तुमने

जब फलसफा ज़िन्दगी का लिखोगे तुम

कुछ लफ्ज हमारे लिए भी लिखने होंगे

साथ बिताए लम्हों का ज़िक्र करना होगा

छुपाओगे तो
,धोखा खुद से  करोगे तुम
हमारे साथ किया वो खुद से करना होगा

अपनी फितरत का शिकार खुद होगे तुम

ना चैन से रह सकोगे
,ना सो सकोगे तुम
याद   हमें इक दिन  करोगे तुम
निरंतर इल्ज़ाम जो लगाया हम पर
उसे  झूंठा कहोगे तुम
सच से दुनिया को रूबरू कराओगे तुम
08-04-2011
629-62-04-11

इन्हें शर्म नहीं आयेगी,कुछ और करना होगा


देश के 
नेता बहुत ढीठ हैं

मोटी चमड़ी के नीचे
काला दिल
दिमाग,बेईमानी के
नए तरीकों से युक्त है
इन्हें शर्म नहीं आयेगी
कुछ और करना होगा
इनका बहिष्कार
करना होगा
नाम के आगे श्री की जगह
बेईमान लगाना होगा
सामाजिक कार्यक्रमों से
भगाना होगा
पीकदान,कूड़ेदान का नाम
इनके नाम पर रखना होगा
इनका नाम लेने से
पाप लगेगा
बच्चों को सिखाना होगा
निरंतर ज़लील करना होगा
इनकी मूर्तियों को
जूतों की माला से सजाना
होगा
गाली की जगह
इनका नाम लेना होगा
अगले चुनाव से भगाना होगा
कभी शक्ल ना दिखाएँ
अपनी शक्ल से भी डर जाएँ
ऐसा कुछ करना होगा
देश को भ्रष्ट नेताओं से
मुक्त करना होगा
08-04-2011
628-61-04-11


उसने दीवाना समझा वो परवाना था

उसने
दीवाना समझा
वो परवाना था
शमा के आगोश में
रहना चाहता था 
रोशनी में
होश खो बैठा
उफ़ करे बिना
गर्मी-ऐ-हसरत में
जलता रहा
हर सितम खुशी से
सहता रहा
कब जल कर ख़ाक हुआ
शमा को
खबर तक ना हुयी
बेखबर शमा
माहौल को रोशन
करती रही
अँधेरे में जीती रही
एक दिन
वो भी बुझ गयी
कॉपीराइट@
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
गर्मी-ऐ-हसरत ,मोहब्बत,क्षमा,दीवाना,परवाना,सितम
08-04-2011
626-59-04-11

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

एक और गांधी आया,लोगों को घर से बाहर लाया


एक और 
गांधी आया 
लोगों को घर से
बाहर लाया
देश में जलजला आया
त्रस्त जनता का गुबार
बाहर आया
भ्रष्ट नेताओं को पसीना आया
खेल बरगलाने का चालू है
सांप मर जाए लाठी
ना टूटे का खेल जारी है
बूढ़े,युवा,बच्चे सड़कों पर निकले
भ्रष्टाचार मिटाने के प्रण से
आन्दोलन में जुटे
कफ़न सर पर बांध
अन्ना भूख हड़ताल पर बैठे
मांगों को मानना होगा
भ्रष्टाचारियों को जेल जाना होगा
निरंतर तड़प रही
जनता के सामने
सरकार को झुकना होगा
भारत को
भ्रष्टाचार मुक्त करना होगा
अन्ना हजारे का सपना
पूरा होगा
07-04-2011
625-58 -04-11

एक रात बीत गयी ,एक सुबह आ गयी


सूरज का
दरवाज़ा बंद होने लगा
आकाश में अन्धेरा
छाने लगा 
मजदूरों ने काम 
बंद किया
पक्षी घर लौटने लगे 
बत्तियां जलने लगी 
चाँद ने मुंह निकाला 
तारों को साथ लाया
नीरवता बढ़ने लगी 
रात शवाब पर आयी 
उल्लू बोलने लगे 
झींगुर 
क्यों पीछे रहने लगे ? 
कुर्र कुर्र करने लगे 
चोरों में जाग हुयी
शिकार की 
तलाश शुरू हुयी 
जागते रहो की 
आवाज़ आयी 
नींद चुपके से छाने लगी
सोने वालों को सपने 
आकाश की सैर कराने लगे 
चाँद थकने लगा 
तारे बुझने लगे 
भोर को आमंत्रण मिला  
भोर आयी चाँद विदा हुआ
तारों को साथ ले गया 
सूरज ने अंगडाई ली 
धरती पर किरनें बिखरी
चौकीदार उबासी लेने लगे 
पक्षी चहचहाने लगे
घरों में चूल्हे जलने लगे 
मजदूर काम पर जाने लगे
एक रात बीत गयी
एक सुबह आ गयी
कॉपीराइट@

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
07-04-2011
624-57 -04-11
दिन,रात,जीवन भोर,