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शनिवार, 15 जनवरी 2011

फूल गैंदे का व्यथित.तना उस के पौधे का कमजोर

फूल
गैंदे का व्यथित
तना उस के पौधे का
कमजोर
ज़रा से धक्के से टूट
सकता
जीवन उसका समाप्त
हो सकता
गुलाब के फूल से रश्क
होता
पौधा गुलाब का खूब
महकता
मजबूती से खडा
रहता
एक दिन गुलाब का
काँटा माली के चुभा
माली ने गुस्सा फूल
पर निकाला
फूल को तोड़ लिया
कैंची से डालियों को
काट दिया
गेंदे को अब समझ
आया
निरंतर होड़ से दूर
रहना चाहिये
जो
दिया परमात्मा ने
उस में संतुष्ट रहना
चाहिए
संतुष्टी,सुखी जीवन का
मूल मन्त्र
ध्यान में रखना
चाहिए
15-01-2011

काव्यात्मक लघु कथा-क्यों हम बातों को,अपने नज़रिए से ही देखते



काव्यात्मक लघु कथा  
========================
बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे
गेंद के लिए भाग दौड़ रहे थे
मैदान के बाहर एक बच्चा
तन्मयता से खेल देख रहा था
हर शॉट पर ताली बजाता
खिलाड़ियों का उत्साह बढाता
बैट्समेन ने शॉट मारा
गेंद को सीमा पार पहुँचाया
शेत्र रक्षक ने बच्चे को
गेंद फेंकने का इशारा किया
बच्चे ने ना में सर हिलाया
शेत्र रक्षक को गुस्सा आया
गेंद नहीं लौटाने पर
अपशब्द कहने लगा 
बच्चे की आँखों में आंसू आ गये
पैरों की तरफ इशारा किया
विकलांग था,
किसी तरह समझाया
खिलाड़ी का मन
ग्लानी से भर गया
बच्चे से माफी मांग
मन में सोचने लगा
क्यों हम बातों को
अपने नज़रिए से ही देखते हैं 
अपने तरीके से ही सोचते हैं 
जैसा चाहते हैं वैसा ना हो
तो क्रोधित होते हैं 
सहनशीलता खोते हैं 
दूसरे को समझने की
कोशिश नहीं करते
बाद में प्रायश्चित करते हैं 
डा.राजेंद्र तेला, निरंतर,
15-01-2011

महिलाओं से उलझने की गलती,फिर नहीं करूंगा


एक
महिला ने
हंसमुख जी से पूंछा
कैसे हो ?
हंसमुख जी बोले 
तुम बताओ
कैसी  हो?
जवाब आया, 
पहले मैंने  पूंछा
इसलिए तुम बताओ
हंसमुख जी बोले, 
लेडीज़ फर्स्ट
महिला बोली इडीयट
हंसमुख जी बोले
चल दूर हट
महिला से बर्दाश्त 
ना हुआ
क्रोध में बोली
भाग जा फटाफट
निरंतर संवाद से 
परेशान
उन्होंने जवाब दिया
बार बार एक बात
मत  रट
अब गले मत पड
बातों से दिमाग खराब
कर दिया
इतना वक़्त बर्बाद
कर दिया
मुझे जीते जी 
मार दिया
मैं ही गलती पर था
आज तक महिलाओं से
कोई जीता है
जो मैं जीतूंगा
अगर जीत भी गया तो
ज़िंदा नहीं बचूंगा
कसम खाता हूँ
वो सफ़ेद को काला कहें
तो काला कहूंगा
महिलाओं से उलझने की
गलती
फिर नहीं करूंगा
जान प्यारी है
मुफ्त में नहीं
गवाऊंगा
15-01-2011

शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

दुनिया में आये हैं,तो हंस के जिएँगे


दुनिया 
में आये हैं
तो हंस के जिएँगे
मसले कई आएँगे
हिम्मत से लड़ेंगे
आँखें दी हैं
अश्क भी बहाएंगे
नज़रों से नज़रें भी
लड़ाएँगे
कभी मुस्कराएँगे
 कभी बातें इशारों से
करेंगे
कोई और दिल तोड़ दे
हम ना तोड़ेंगे
मोहब्बत का जवाब
निरंतर मोहब्बत
से देंगे
जान अपनी उसके
खातिर लुटाएँगे
पैगाम मोहब्बत का
जहाँ में फैलायेंगे
14-01-2011

ना शक करो ना शुबहा करो,यकीन हम पर करो


ना 
शक करो
ना शुबहा करो
यकीन हम पर करो
मुस्कान का जवाब
मुस्कान से दो
प्यार का जवाब
प्यार से दो
हम को समझो
हर बात को दिल से
ना लगाओ
हमें माफ़ करो
निरंतर बातों का
मतलब
गलत ना लगाओ
जो नागवार लगे उसे
हवा में उडाओ
दिलों को जोड़ने का
काम करो
मतभेदों को दूर
करो
जहन से नफरत
हटाओ
मोहब्बत से इसे
 सजाओ
शिकवा,शिकायत
 बंद करो
छोटी सी ज़िन्दगी को 
खुशी से जी
लो
14-01-2011

उम्र कम हो या ज्यादा,दिल काला,मुस्कान में जहर भरा




उम्र
कम हो या ज्यादा
दिल काला
मुस्कान में जहर भरा
तारीफ़ में मज़ाक छुपा
दिखावा प्यार का
दिल नफरत से भरा
ऐसे लोगों से बचना
मीठी बातों में ना आना
खंजर मारने से पहले
नहीं बताएँगे
मरने के बाद गीत
खुशी के गाएँगे
निरंतर तुम्हें लुभाएँगे
इन से दूर रहना
इनके जाल में ना
फसना
दुआ खुदा से
करना
14-01-2011

अगर इंसान के बाल ना होते,सब के सब गंजे होते

अगर इंसान
के बाल ना होते
सब के सब गंजे
होते
सारे इंसान एक से
दिखते
मुश्किल से पहचाने
जाते
नाई कुछ और करते
कोई किसी को गंजा
ना कहता
मज़ाक किसी का
नहीं उडाता
शेम्पू,तेल,का धंधा
मंदा होता
क्रोध में कोई सर
ना खुजाता
जुओं को ढूंढना ना
पड़ता
चुटिया, दाढी कोई
ना जानता
मूंछ पर ताव कोई
ना देता
कंघा कभी कोई साथ
ना रखता
ना शेव बनानी
पड़ती
ना दाढी गालों पर
चुभती
पत्नी कभी नाराज़
ना होती
अगर इंसान
बिना बाल का होता
"निरंतर" चाँद पर हाथ
फिराता
14-01-2010