ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 8 जनवरी 2011

मुझ पर रंग ना डालो, मेरे संग होली ना खेलो


मुझ पर
रंग ना डालो
मेरे संग
होली
ना खेलो
रंग पीया का
चढ़ चुका
अब कोई रंग ना 

चढ़ेगा मुझ पर
दिल पीया को दिया
मन में पीया को
बिठाया
किसी और का असर
ना होगा मुझ पर
परमात्मा
पीया को माना
आँखों ने सिर्फ
उसे पहचाना
कोई और अब
दिखता नहीं
रास्ता
अब कोई नज़र
आएगा नहीं
अब पीया को
पाना है
रंग पीया संग
खेलना है
तन उसको ही
देना है
जीवन भर साथ
निभाना है
08-01-2011
++++++++++

हंसमुखजी कभी जवान थे,कद काठी के पूरे,जोश से भरे

हंसमुखजी कभी जवान थे,कद काठी के पूरे,जोश से भरे

हंसमुखजी
कभी जवान थे
कद काठी के पूरे
जोश से भरे
दिमाग आसमान में
अरमान पंछी से उड़ते
निरंतर नज़रों से नज़रें
लड़ाते
अपने को मजनूँ का
बाप समझते
हर मोहतरमा को
अपना समझते
सपने में लैला देखते
मुस्करा कर न्योता देते
ज़िन्दगी साथ बिताने का
वादा करते
कुछ वक़्त में किनारा
करते
लोग अपनी किस्मत
को रोते
हज़ारों बद्दुआ देते
अब बूढा  गए
काले बाल सफ़ेद हुए
गाल पिचक गए
नज़रों से मंद हुए
अरमान टूट गए
कुंवारे रह गए
हर मोहतरमा में
बहन बेटी देखने
लगे
निरंतर सुहाग की
दुआ देने लगे
दिलों को तोड़ने पर
अफ़सोस करते
मन ही मन खुदा से
माफी मांगते
बुढापे के कहर से
खैर मांगते
08-01-2011

मन तो आखिर मन है

मन,
निश्चल,शीतल,निर्मल
पावन,पवित्र,बच्चे
सा होता
चेतन,अचेतन अवस्था
में रहता
कभी विचलित
कभी प्रफ्फुलित होता
कोई मसोसता
दोष किस्मत को देता
किसी का चंचल
बंधन निरंतर तोड़ता
कोई भरोसा उस पर
रखता
फैसले उसके कहने से
करता
किसी का पंछी सा
उड़ता
प्रेम में डूब,सुध बुध
खोता
चोट खाकर आहत
होता
किसी का चुपचाप
सहता
मन किसी का विश्वाश,
किसी का अंध विश्वाश
से भरा
कोई बेमन,
कोई अल मस्त
जीता
किसी का अहम्
से भरा
किसी का प्यार से
पिघलता
व्यथित,औरों के दुःख में
होता
मन के भी,मन होता
होगा
कभी हंसता,कभी रोता
होगा
मेरा मन बावरा
निरंतर नया करता
कुछ ना कुछ लिखता
रहता
मन तो आखिर
मन है
दिखता नहीं,फिर भी
बस में नहीं
रहता
08-01-2011

मैं बंधा हुआ,वो खुला आकाश


मैं 
बंधा हुआ
वो खुला आकाश
मैं छटपटाता वो,
पंच्छी सा उड़ते
 
साथ उड़ने की
कोशिश करता
दुनिया की नज़रों से
बचता
खामोशी से मोहब्बत
करता
एक दिन ऐसा आया
वक़्त ने उन्हें भी
दुल्हन बनाया
वो भी बंध गए
किसी के हो गए
अब वो भी कभी कभी
छटपटाते
हाल दिल का बताते
उड़ने की कोशिश में
बातों से काम चलाते
निरंतर,जो मैंने सहा
वो भी सहते
दूर से दिल लगाते
माँ और पत्नी का
धर्म निभाते
बहुत खुश हूँ,कहते
बीते दिनों को याद करते
जानते हुए भी
धोखा खुद को देते
हकीकत में
मोहब्बत अब भी
करते
08-01-2011

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

कागज़ बिन जीवन अधूरा

कागज़
बिन जीवन अधूरा
योगदान इसका
अनूठा
कहानी इसकी कोई
ना कहता
चिट्ठी पत्री इस पर
लिखता
यात्रा इसके जीवन
की लम्बी
सदियों तक चलती रहती
निरंतर काम इंसान
के आता
चाहे जैसे काम में लेता
कई रंग रूप में मिलता
हर उम्र में काम आता
घर,दफ्तर इसके बिना
ना चलता
इतहास संसार का
इस पर छपता
कवी जज्बात इस
पर लिखता
अखबार बन खबरें
बताता
जीवन इसका महान
युगों से बरकरार
इसकी शान
06-01-2011

तुम्हें एक तोहफा देना चाहता हूँ


तुम्हें
एक तोहफा देना
चाहता हूँ
तोहफे में तुम्हें क्या दूं
एक फूल गुलाब का
या फूलों का गुलदस्ता दूं
कुछ ख्वाब तुम्हारे लिए
या अपने सपने दूं
कुछ शब्द प्यार के
या प्यार पर किताब दूं
कुछ वक़्त साथ गुजारूं
या दिल तुमको दूं
निरंतर इच्छा होती है
ज़िन्दगी तुमको क्यों ना दूं
जो क़ुबूल कर लो
मेरा वजूद तुमको
दे दूं
06-01-2011

आज कल इंसान से डरता हूँ,कम लोगों से मिलता हूँ



आज
कल इंसान से
डरता हूँ
कम लोगों से
 मिलता हूँ
मुस्काराहट से
घबराता हूँ
एक हाथ में फूल,
एक में खंजर
से सहमता हूँ
निरंतर अपनों से
धोखा खाया
दुश्मन को यार
बनाया
बिना यारों के जीना
चाहता हूँ
फरेब से बचना
चाहता हूँ
सुकून से जीना
चाहता हूँ
06-01-2011