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शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

ना जाने ऐसा ये क्यों हो रहा है?


ये ज़मीं रो रही है 
ये आसमां रो रहा है
इंसान से इंसान
नफरत कर रहा है
माँ बाप से बच्चों का
मोह भंग हो रहा है
ये दिल रो रहा है
ये मन रो रहा है
ना जाने ऐसा
ये क्यों हो रहा है?
भाई बहन में प्यार
ख़त्म हो रहा है
रिश्तों में खटास
पैदा हो रहा है
ये ज़मीं रो रही है
ये आसमां रो रहा है
ना जाने ऐसा
ये क्यों हो रहा है?
प्यार भाईचारे का
नामोंनिशाँ ख़त्म
हो रहा है
अपनों का अपना
,पराया समझ रहा है
दोस्त की पीठ में
दोस्त छुरा भौंक रहा है
बड़े छोटे में फर्क कम
हो रहा है
हर शख्श अपने लिए
जी रहा है 
ये दिल रो रहा है
ये मन रो रहा है
ना जाने ऐसा
ये क्यों हो रहा है?
दिलों में निरंतर रंज
घर कर रहा है
हर शख्श 
चेहरे पर चेहरा 
लगा कर घूम रहा है
दुनिया को दिखाने को
हंस रहा है
पल पल मर रहा है
जीने का नाटक
कर रहा है
ये ज़मीं रो रही है
ये आसमां रो रहा है
ये दिल रो रहा है
ये मन रो रहा है
ना जाने ऐसा
ये क्यों हो रहा है?
ना जाने ऐसा
ये क्या हो रहा है ?
14-12-2011
1861-29-12

16 टिप्‍पणियां:

  1. हर शख्श
    चेहरे पर चेहरा
    लगा कर घूम रहा है
    दुनिया को दिखाने को
    हंस रहा है
    पल पल मर रहा है
    जीने का नाटक
    कर रहा है
    ये ज़मीं रो रही है
    ये आसमां रो रहा है....वाह! निरंतर जी बहुत ही उम्दा लिखा आप ने .....

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज के जीवन की त्रासदियों को समेटे हुए,मन को छू लेने वाली रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  4. ये प्रश्न तो मुंह बाए खड़े हैं ही... हम ढूंढें अपने ही भीतर एहसास फिर शायद दुनिया में बची खुची आत्मीयता भी दृश्यमान हो!
    लिखते रहे यूँ ही निरंतर!

    उत्तर देंहटाएं
  5. ये ज़मीं रो रही है
    ये आसमां रो रहा है
    बहुत अच्छा .

    उत्तर देंहटाएं
  6. sam samyik rachna sahi kaha aaj koi khush nahi hai
    lagta hai is yug ka ant nikat hai.

    उत्तर देंहटाएं
  7. क्या आशा थी, क्या पाया है,
    देखो सब कुछ भरमाया है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. ऐसा क्यूँ हो रहा है?
    एक ऐसा प्रश्न जिससे हर कदम मुलाक़ात हो जाती है....
    सशक्त रचना....
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  9. ये ज़मीं रो रही है
    ये आसमां रो रहा है
    ये दिल रो रहा है
    ये मन रो रहा है
    ना जाने ऐसा
    ये क्यों हो रहा है

    ....बहुत सटीक और सुंदर प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह बहुत खूब ....सच में आज ऐसा ही हो रहा है

    उत्तर देंहटाएं
  11. आज के समय की त्रासदियां हैं,सटीक प्रस्तुति.

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