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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

हँसमुखजी का निशाना (हास्य कविता)


हँसमुखजी पोते के साथ
क्रिकेट खेल रहे थे
गेंदबाजी कर रहे थे
गेंद कभी विकेट के
तीन फीट दायें
कभी तीन फीट बायें से
निकल रही थी
पोता परेशान हो गया
कहने लगा
दादाजी आप झूठ
बोलते हैं
एक भी गेंद विकेट पर
सीधे ड़ाल नहीं सकते
लेकिन डींग हांकते हो
आपने जवानी में कई शेर
सटीक निशाने से मारे
हँसमुखजी बोले
तुम आधा गलत
आधा ठीक कहते हो
शेर तो मैंने ही मारे
पर निशाना तब भी
ऐसा ही था
डर नहीं लगे इसलिए
शिकार पर जाने से पहले
जम कर शराब पीता था
नशे में
शेर होता कहीं और था
दिखता कहीं और था
दिखता तीन फीट बायें
होता तीन फीट दायें
शेर को निशाना लगाता
गोली सीधी शेर को
जाकर लगती
तीन फीट का हिसाब
अभी भी चल रहा है
पीना छोड़ दिया है
इसलिए
लाख कोशिशों के 
बाद भी 
गेंद विकेट पर नहीं
 लगती
07-12-2011
1846-14-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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