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रविवार, 11 दिसंबर 2011

गर दिल यूँ ही सताता रहेगा


गर दिल यूँ ही
सताता रहेगा
उम्र का लिहाज भी
ना करेगा
कभी बूढा ना होने देगा 
निरंतर
नए ख्वाब दिखाता  
रहेगा
इंतज़ार में डूबा
रखेगा
तो कहीं मरना ही
ना भूल जाऊं
मर भी जाऊं
तो जाकर लौट
आऊँगा
हसीं अहसासों का
लुत्फ़ लेता रहूँगा
लम्हा लम्हा मस्ती में
जीता रहूँगा
10-12-2011
1850-18-12

15 टिप्‍पणियां:

  1. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 12-12-2011 को सोमवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. गर दिल यूँ ही
    सताता रहेगा
    उम्र का लिहाज भी
    ना करेगा
    कभी बूढा ना होगा.

    बेशक मेरी शुभकामनायें आपके साथ. दिल कभी बुढा ना हो.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सकारात्मक सोच लिए बढ़िया रचना.
    ये दिल न होता बेचारा, कदम न होते आवारा
    जो कोई अपना खूबसूरत हमसफर होता.

    उत्तर देंहटाएं
  4. लम्हा लम्हा मस्ती में
    जीता रहूँगा,आमीन! ईश्वर से बस यही चाहें हम।
    सुंदर रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर रचना ..!
    आभार !
    मेरे ब्लॉग पे आयें आपका स्वागत है !

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।
    कल 14/12/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, मसीहा बनने का संस्‍कार लिए ....

    उत्तर देंहटाएं
  7. waah bahut khub...........sach kaha apne gar ye dil kabhi naa mana tho??????

    उत्तर देंहटाएं
  8. लम्हा लम्हा मस्ती में
    जीता रहूँगा,
    वाह! बहुत सुन्दर रचना..
    सादर..

    उत्तर देंहटाएं
  9. क्या बात है ...बहुत खूब ..आभार

    उत्तर देंहटाएं