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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

चलो अच्छा हुआ ,कल होता आज हो गया (हास्य कविता)


हँसमुखजी का
तकिया कलाम था
चलो अच्छा हुआ ,
कल होता आज हो गया
हर बात में
चलो अच्छा हुआ ,
कल होता आज हो गया
कहना उन्हें कई बार
आफत में डालता
दोस्त से चार दिन तक
नहीं मिलने का कारण पूछा
दोस्त बोला पत्नी को
बिच्छू ने काट लिया था
हँसमुखजी बोले
चलो अच्छा हुआ ,
कल होता आज हो गया
दोस्त को बुरा लगा
दोस्त
फिर पांच दिनों बाद मिला
उन्होंने फिर कारण पूछा
दोस्त बोला बच्चे का
एक्सीडेंट हो गया था
हँसमुखजी बोले ,
चलो अच्छा हुआ ,
कल होता आज हो गया
दोस्त को क्रोध आया
पर चुप रहा
अगली बार दोस्त
पंद्रह दिन बाद मिला
उन्होंने फिर कारण पूछा
दोस्त ने जवाब दिया
पिताजी गुजर गए थे
हँसमुखजी बोले
चलो अच्छा हुआ ,
कल होता आज हो गया
इस बार दोस्त
बर्दाश्त नहीं कर सका
क्रोध में
हँसमुखजी के गाल पर
चमाट जमा दिया
हँसमुखजी
बिलबिलाते हुए बोले
थप्पड़ क्यों मारा ?
दोस्त बोला
चलो अच्छा हुआ ,
कल होता आज हो गया
अब हँसमुखजी ने पुराना
तकिया कलाम छोड़ दिया
नया शुरू कर दिया
आज कल
हर बात पर कहते हैं
जो हुआ बहुत बुरा हुआ
पूरी उम्मीद है
इसका भी नतीजा उन्हें
एक दिन भुगतना पडेगा
जब होना होगा हो
जाएगा
19-12-2011
1871-39-12

6 टिप्‍पणियां:

  1. आ हा हा हा …………ये भी खूब रही।

    उत्तर देंहटाएं
  2. hahahahahaha........bahut badiya..चलो अच्छा हुआ ,
    कल होता आज हो गया

    agli kavita ka intzaar rahega

    उत्तर देंहटाएं
  3. मज़ा आ गया,बेचारे हँसमुख जी तकिया कलाम बड़ा भारी पड़ा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. हंसमुखजी...
    चलो ये भी अच्छा ही हुआ....
    जो कल होना था..
    आज हो गया...

    उत्तर देंहटाएं