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शनिवार, 31 दिसंबर 2011

मेरी मेहमान खाने की अलमारी में

मेरी मेहमान खाने की
अलमारी में
कई किताबें करीने से
सजी हैं
कुछ तन्मयता से 
पढी गयी
जान पहचान वालों के बीच
उनकी चर्चा की गयी
कुछ के कुछ प्रष्ठ ही  
कई ऐसी भी हैं
जिन्हें खोल कर 
देखा भी नहीं
कुछ सालों से
कुछ महीनों से 
अलमारी की
शोभा बढ़ा रही हैं
हर आने वाले को
खामोशी से मेरे
साहित्य प्रेमी  होने का
सबूत देती हैं
जिन्हें खोल कर भी 
नहीं देखा
वो किताबें
मन में व्यथित भी 
होती होंगी
सोचती होंगी
जितने मन से लेखक ने
उनका सृजन किया
उतने ही मन से
क्यों मैंने उन्हें अलमारी में
धूल खाने को सजाया
मेरे कई चेहरों में से एक
साहित्य प्रेमी होने का
चढ़ाया
जिन्हें मन से पढ़ा
वो खुश होती होंगी
मेरी बढ़ाई करती होंगी
मेरे साहित्य प्रेमी होने का
साक्ष्य देती होंगी
मेरी पढने की इच्छा ,
अनिच्छा
किताबों में द्वेष पैदा 
करती होगी
मुझे इन सब बातों से
कोई मतलब नहीं
निरंतर
नयी किताबें लिखी 
जायेंगी
जो प्रसिद्द होंगी
चाहे पढूं नहीं
पर दिखाने के लिए 
खरीदी जायेंगी
एक अलमारी भर जायेगी
दूसरी में सजा दी
जायेगी
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर", 
26-12-2011
1889-57-12

8 टिप्‍पणियां:

  1. सबको एक दिन मरना है पर कोई मरना नहीं चाहता !
    बहुत बड़ा आश्चर्य है ..!
    बहुत सुन्दर !
    नव वर्ष की बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार कविता! बधाई!
    आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्यों को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  3. मन की छटपटाहट ...बहुत सही से समझ आ रही है


    नया साल मंगलमय हो

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाकई....जो पन्‍ने अनछुए रह जाते हैं वो व्‍यथि‍त होते होंगे....मतलब जीवन भी हमारा कुछ ऐसा ही होता है। अच्‍छी है बहुत कवि‍ता। आपको नववर्ष की बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन भाव संयोजन

    नववर्ष की अनंत शुभकामनाओं के साथ बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. किताबों की कहानी के माध्यम से ज़िन्दगी का एक पन्ना खोल गए आप . बहुत सुन्दर और गहरी रचना . नए वर्ष की शुभ कामनाएं .

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर ! जितनी सार्थक रचना उतनी ही कलात्मक ! शुभकामनायें !
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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