ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

हाल-ऐ-दिल क्यूं बताएं?

किस्मत के हादसे 
कैसे सुनाएं ?
किस किस ने मारी ठोकरें 
कैसे बताएं?
मोहब्बत के गीत बहुत
 गाये थे
अब मातमी धुन  कैसे
 बजायें ?
दिल में उठते हैं  यादों के तूफां
किश्ती को किनारे  कैसे
लगायें?
हसरतों की कब्र निरंतर
खुदती रही
उन्हें  दफ़न होने से कैसे
बचाएं ?
तकदीर ही कुछ ऐसी थी
अब अश्क क्यूं  बहायें ?
अब खामोशी में ही सुकून है
हाल-ऐ-दिल क्यूं बताएं?
24-12-2011
1885-53-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. हाल-ऐ-दिल....दिल की बात दिल में छिपाने वाले ही
    अपने हाले-ऐ-दिल हूँ छिपाते हैं

    उत्तर देंहटाएं