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रविवार, 25 दिसंबर 2011

गरीब निरंतर गरीब ही रहा


नव वर्ष आया
बोनस मिला
तनखा बढ़ गयी
महंगाई भी बढ़ गयी
खुशी में जश्न मनाया
पुराना उधार चुकाया
एक चौथाई खर्च
हो गया
महीना मार्च का आया
होली का त्यौहार आया
कपड़ों को रंगों में
भिगोया
छोटा लड़का पानी में
भीग कर बीमार
हो गया
एक चौथाई और खर्च
हो गया
महीना जून का आया
बच्चों को घुमाया
फिराया
स्कूल खुलने का
समय आया
फीस,और ड्रेस में
एक चौथाई और खर्च
हो गया
अक्टूबर का महीना आया
बहन का विवाह हुआ
बचा एक चौथाई उसमें
खर्च हो गया
नवम्बर में
दीपावली का त्यौहार आया
मिठाई ,पटाखों
नए कपड़ों ने मन
ललचाया
उधार लेकर काम
चलाया
किसी तरह रूखा सूखा
खाकर
काम चलाता रहा
नव वर्ष का इंतज़ार
करता रहा
गरीब निरंतर गरीब
ही रहा
20-12-2011
1876-44-12

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 26-12-2011 को सोमवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपके पोस्ट पर आना सार्थक हुआ । बहुत ही अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट "उपेंद्र नाथ अश्क" पर आपकी सादर उपस्थिति प्रार्थनीय है । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. नव वर्ष यूं ही आते रहेंगे,निरंतर हमें लुभाते रहेंगें।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर रचना,...अच्छी प्रस्तुती,
    क्रिसमस की बहुत२ शुभकामनाए.....

    मेरे पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--बेटी और पेड़-- मे click करे

    उत्तर देंहटाएं