ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

चेहरा दिखाकर छुप जाते हैं लोग


चेहरा दिखाकर छुप जाते हैं लोग
जब भी चाहते भूल जाते हैं लोग

दिल लगाने को बातें करते हैं लोग
हँसा हँसा कर फिर रुलाते हैं लोग

ना जाने कौन सा बदला लेते हैं लोग
हसीं ख्वाब दिखा कर तोड़ते हैं लोग

 यादों  के लम्हे छोड़ जाते हैं लोग
निरंतर इंतज़ार में तडपाते हैं लोग

ग़मों का बोझ छोड़ जाते हैं लोग 
जिला जिला कर मारते हैं लोग
18-12-2011
1868-36-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!

    उत्तर देंहटाएं
  2. चेहरा दिखाकर छुप जाते हैं लोग
    जब भी चाहते भूल जाते हैं लोग
    ...aadat jo ban jaati hai..
    bahut khoob!

    उत्तर देंहटाएं