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सोमवार, 19 दिसंबर 2011

अंजाम क्या होगा ?


दिल को लाख
मगर रुका नहीं
मनाया तो माना नहीं
उनको देखते ही
मचलने लगा
उसे मंजिल का पता
चल गया
सपनों की दुनिया में
खो गया
दिल बेचारा गुलाम
हो चुका था
मोहब्बत के जाल में
फंस चुका था
अंजाम क्या होगा ?
सिर्फ खुदा को पता था
उसे तो निरंतर
रातों को जागना था
इंतज़ार में जीना था
16-12-2011
1866-34-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. dil hi to hai manta nahi ......
    उसे मंजिल का पता
    चल गया
    सपनों की दुनिया में
    खो गया................sunder :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. यशवन्त माथुर19 दिसंबर 2011 को 5:58 pm

    यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...
    बहुत खूब सर!

    ----
    कल 19/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    December 18, 2011 3:52 PM

    उत्तर देंहटाएं
  3. S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...
    बहुत खूब सर..
    सादर...

    December 19, 2011 5:42 PM

    उत्तर देंहटाएं
  4. सदा said...
    वाह ...बहुत खूब ।

    December 19, 2011 1:22 PM

    उत्तर देंहटाएं
  5. anju(anu) choudhary has left a new comment on your post "अंजाम क्या होगा ?":

    waah ...umdaa

    उत्तर देंहटाएं