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गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

तुम नाराज़ क्यों हो?


तुम नाराज़ क्यों हो?
क्या कहा मैंने,
क्या करा मैंने?
जिसने तुम्हें खामोश
कर दिया
तुम्हारी नाराजगी को
ज़ाहिर कर  दिया
क्यातुम्हें अच्छा कहना
जुर्म हो गया?
या स्नेह भरे लफ़्ज़ों से
ख़त में
तुम्हारी तारीफ़ ने
तुम्हारे मन में मेरे
इरादों पर
शक पैदा कर दिया
क्या रिश्ते पाक नहीं
हो सकते?
क्या अच्छी बात को
अच्छा नहीं कह सकते ?
तुम्ही बताओ कोई कद्रदां
जिनको चाहता
कैसे अपनी बात उस तक
पहुंचाए ?
कसूर तुम्हारा भी नहीं
तुम मुझे जानती भी नहीं
मुझसे कभी मिली भी नहीं
वैसे भी आजकल
अच्छे बुरे का पता कहाँ
चलता है
सच ही तो है
मुस्काराते चेहरों के पीछे
हवस का शैतान छिपा
होता है
चलो कोई बात नहीं
मैं अपनी जगह
तुम अपनी जगह ठीक
सोचती हो
जब मन करे मुझे
आजमां लेना
मुझे तुम्हारे क्रोध से
कोई नाराजगी नहीं
ना ही मन में कोई रंज है
शायद तुम्हारी जगह
मैं होता तो यही करता
तुम्हारी
नाराजगी के बाद भी
बड़े होने के नाते
सच्चे दिल से
स्नेह और आशीर्वाद
सदा देता रहूँगा
तुम्हारी खुशी के लिए
दुआ करता रहूँगा
इस ख़त को
मेरी इमानदारी की
अभिव्यक्ती मत
समझना
मेरे निश्छल मन की
पीड़ा समझना
एक बार गहनता से
सोचना
क्या सबको एक लाठी से
हांकना ठीक होता ?
क्या बुरों के कारण
अच्छों को सज़ा देना
उचित होता ?
तुम्हारे जवाब का
इंतज़ार तो नहीं करूंगा
पर जिस दिन तुम्हारी
चुप्पी टूट जायेगी
खुद समझ जाऊंगा
तुम नाराज़ नहीं हो
06-12-2011
1843-11-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. कविता रूपी पत्र,सुंदर अलग सी प्रस्तुति। वेदना में है स्नेह भरा...

    उत्तर देंहटाएं





  2. आदरणीय डॉ.राजेंद्र तेला"निरंतर" साहब
    सस्नेहाभिवादन !

    बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति -
    तुम्हारे जवाब का
    इंतज़ार तो नहीं करूंगा
    पर जिस दिन तुम्हारी
    चुप्पी टूट जायेगी
    खुद समझ जाऊंगा
    तुम नाराज़ नहीं हो


    आपकी रचनाएं पढ़ता रहता हूं …
    निरंतर चलती है आपकी कलम वाकई :)


    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी कविता सच कितने करीब होती है कि पढने के बाद ऐसा लगता है जैसे ये मेरे अपने दिल की बात है .....

    उत्तर देंहटाएं
  4. सबको एक ही लाठी से हांकना बिलकुल ठीक नहीं...
    प्रार्थना करेंगे कि जहां तक इस वक्तव्य को पहुंचना है.. वहां तक पहुंचे! आपकी अभिव्यक्ति निरंतर सुन्दरता का सृजन कर रही है...
    शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुंदर .भाव को पूरा दर्शा दिया .........
    दिल को .भावो को उकेर दिया .
    बस इतना ही कहूँगी सब एक से नहीं होते ....
    अच्छे लोगो को अच्छे लोग मिल ही जाते है ...
    रिश्ते जमीं पर नहीं आसमान से जुड़ कर ही आते है . ..
    जीवन में मुसुकारा कर ही दुःख बाटेंजाते है ....!

    आपकी लेखनी आपकी तरह ही निर्मल है , सदा अपनी ही प्रस्तुति लगती है . ...:) :)
    हार्दिक बधाई

    उत्तर देंहटाएं