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रविवार, 4 दिसंबर 2011

अब आँसू बहाना छोड़ दो


अब आँसू बहाना छोड़ दो
हँस कर जीना सीख लो
जो हो गया उसे भूलो
हिम्मत होंसले से आगे बढ़ो
सपने बहुत देखे तुमने
कितने टूटे कितने पूरे हुए
ये भी खुद से पूछ लो
बहुत रोये बहुत चिल्लाए 
कितनों ने सुना तुम्हें
अब तक ?
क्यों सोचते हो
सब तुम्हारी तरह सोचें ?
जो तुम चाहते वही करें
सामंजस्य बिठाना जान लो
साथ चलना सीख लो
समय रहते सोच बदल डालों
बाद में पछताना ना पड़े
इस पर विचार कर लो 
खुद का युद्ध खुद को ही 
लड़ना पड़ता है
बस इतना सा जान लो  
नए सोच से जीवन
प्रारम्भ करो
अब आँसू बहाना छोड़ दो
निरंतर
हँस कर जीना सीख लो
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
01-12-2011
1834-99-11-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. सब तुम्हारी तरह सोचें ?
    जो तुम चाहते वही करें
    सामंजस्य बिठाना
    जान लो
    सब के साथ चलना
    सीख लो

    सच कहा आपने

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut sach kaha

    ham tho bas itna jante hai kii jo aaj hai wahi sach hai ....baaki sab mithyaa

    उत्तर देंहटाएं