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शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

बेगुनाह को गुनाहगार करार देते हैं


वादा कर के भी
वो नहीं आये
हमने सोचा नाराज़
हो गए
हम मन में कुढ़ते रहे
निरंतर
हकीकत जाने बिना
कयास लगाते रहे
उन्हें
भला बुरा कहते रहे
शर्म से गढ़ गए
जब पता चला
वो हादसे में घायल
हो गए थे
अस्पताल में
मौत से लड़ रहे थे
अब सोचते हैं
क्यों इंसान
हकीकत जाने बिना
अंदाज से 
ख्याल बनाते हैं
बेगुनाह को 
गुनाहगार करार 
देते हैं
30-11-2011
1830-95-11-11

1 टिप्पणी:

  1. वक़्त पर सच खुदबखुद सामने आ ही जाता है ........बस विश्वास की डोर ओर मजबूत करने की आवश्यकता हैं

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