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बुधवार, 21 दिसंबर 2011

क्षणिकाएं -11


अच्छा- बुरा
मैं किसी के लिए
बुरा
कोई मेरे लिए
अच्छा
फिर शिकायत
किस बात की
*
आडम्बर
खुद के आडम्बर का
पता नहीं चलता
दूसरों का बुरा लगता
*
जब मन रोता
जब मन रोता
आँसूं भी नहीं निकलते
अन्दर ही अन्दर
मनुष्य को खोखला
कर देते
कितना धन आवश्यक
खुदा
बहुत बड़ा अहसान
करता
अगर पैदा होते ही
बता देता
कितना धन आवश्यक
होगा
*

कल की चिंता
कल की चिंता में
घुलते हैं
आज बर्बाद करते हैं
*
हमदर्दी
लोग
हमदर्दी में भी
कंजूसी करते
हमदर्दी की उम्मीद
करते
*
राजनीति के राज़
राजनीति
के राज़
आम आदमी से
छुपे रहते
जिनके नाम पर
नेता
राजनीति करते
*
करूणा
करूणा का
करुण सत्य
कई बार दिखाने के
लिए की जाती
*
जिन्हें जानते नहीं
जिन्हें जानते नहीं
उन्हें जानने की इच्छा
रखते हैं
जानने के बाद
याद रखें या भूल जाएँ
सोचते रहते हैं
*
खुद जीते तो
खुद जीते तो
काबलियत
दूसरा जीते तो
किस्मत
*
गम-खुशी
उनका गम मेरी खुशी
मेरा गम उनकी खुशी
*
सुना था
परमात्मा
सर्वत्र होता
ढूंढा मंदिर
मस्जिद में जाता
*
आशीर्वाद
मुँह मुंबई की तरफ
जाना दिल्ली चाहते
काम दानवों का करते
आशीर्वाद भगवान्
का चाहते
*
गाली
का जवाब
गाली से दिया
उसमें
तुम में क्या फर्क
रहा
19-12-2011
1870-38-12

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