ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

बुधवार, 23 नवंबर 2011

नीम की इच्छा

घर के
आँगन में बरसों से
खडा नीम का पेड़
अब बूढा होने लगा था
परमात्मा से
प्रार्थना में लीन था
कह रहा था
प्रभु कुछ ऐसा कर दे
इंसान सा
ना मरना पड़े मुझे
उम्र बीत गयी घर में
लोगों को
जन्म लेते फिर जाते
देखते
हँसते चेहरे कैसे
मुरझा जाते ?
निरंतर
बीमारी से झूझते झूझते
तिल तिल कर मर जाते
मरने से पहले ही
बार बार मरते
मुझे पता है
सबको एक दिन जाना है 
कुल्हाड़ी से कटवा देना
पर ऐसे तो ना भेजना
दुबारा जन्म लेने का
मन ही ना करे 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
23-11-2011
1811-82-11-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. आना-जाना ही प्रकृति का सच है,सुबह के बाद शाम,रात्रि और फिर सुबह...

    उत्तर देंहटाएं
  2. दिल के भाव को शब्दों के रूप में पढ़ कर अच्छा लगा ...नीम के पेड़ के माध्यम से जीवन के कटु सत्य उजागर किया है आपने

    उत्तर देंहटाएं