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शनिवार, 12 नवंबर 2011

एक लम्हा वफ़ा का दे दे कोई

दिल में आरजू बसी
एक लम्हा वफ़ा का
दे दे कोई
बीमार -ऐ-दिल को
दवा दे दे कोई
मोहब्बत का जवाब
मोहब्बत से दे दे कोई
मेरी तरफ नज़रें  कर ले
टूटे दिल को जोड़ दे कोई 
किश्ती को मंझधार से 
किनारे लगा दे 
दिल को सुकून दे दे कोई 
इल्तजा सुन ले
दिल की धड़कन को 
खुद के दिल की  
धड़कन बना ले कोई 
तन्हाईयों को 
सदा दे दे कोई   

****
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-11-2011
1784-55-11-11
शायरी,आरज़ू.तन्हाई,वफ़ा,मोहब्बत,दिल

7 टिप्‍पणियां:

  1. Sir really its required today..the message you gave in "एक लम्हा वफ़ा का दे दे कोई "

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी प्रस्तुति

    सोमवारीय चर्चा-मंच पर

    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. "मोहब्बत का जवाब
    मोहब्बत से दे दे कोई
    नज़रें मेरी तरफ कर ले
    टूटे हुए दिल को जोड़ दे"

    काश कि ऐसा तो हो कोई....!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. "मोहब्बत का जवाब
    मोहब्बत से दे दे कोई
    नज़रें मेरी तरफ कर ले
    टूटे हुए दिल को जोड़ दे"

    काश कि ऐसा तो हो कोई..
    खूबसूरत.....

    उत्तर देंहटाएं