ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 19 नवंबर 2011

ख्वाईशें दम तोडती रही


जब भी मिलते
निरंतर कहते हम से
किसी दिन
फुरसत में बात करेंगे
उनकी
फ़ुरसत के इंतज़ार में
उम्र बीत गयी
ना उन्हें फुरसत मिली
ना हमारी हसरतें
पूरी हुयी
ख्वाईशें
दम तोडती रही
दिल की बात
दिल में रह गयी
19-11-2011
1799-70-11-11

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें