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सोमवार, 14 नवंबर 2011

मेरे मन की जान लो


तुम्हें
कभी देखा नहीं
फिर भी तुम से
प्यार है
पता नहीं
कभी मिलूंगा भी
या नहीं
फिर भी
मन मानता नहीं
निरंतर
तुम्हारे लिए
व्याकुल रहता
कुशलता के लिए
प्रार्थना करता
मेरे मन की
जान लो
बस इतना सा
ख्याल कर लो
कभी मिलो तो
 पहचान लेना
 मुस्करा कर
देख लेना
14-11-2011
1789-60-11-11

4 टिप्‍पणियां:

  1. aapki kavitaon me bahut komalta aur nootanta hai.
    sunder prastuti.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर कोमल भावनाओं की भावाव्यक्ति बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक सुंदर और भावपूर्ण रचना के लिए बधाई

    उत्तर देंहटाएं