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शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

क्यूं मुझ से खार खाते ?


आज तक
समझ नहीं पाया
वो क्यूं मुझ से खार
खाते ?
ना मुस्कराते
ना नज़रें मिलाते
ना जाने किस बात की
सज़ा मुझको देते
मैंने तो सिर्फ इतना
कहा था
इतना गरूर ना 
रखा करें
जिससे भी मिलें
निरंतर
मुस्करा कर मिला करें
अपने को सबसे बेहतर
ना समझा करें 
24-11-2011
1815-86-11-11

6 टिप्‍पणियां:

  1. हमसे बेहतर कौन? प्रायः यही हम स्वीकार न पाते,इसीलिए खार खाते।

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  2. क्या बात है ....आज तो यहाँ दिल की बात पढने को मिली है .....खुद को बेहतर समझे वाले ...सामने वाले को कम क्यूँ मानते है ....ये उनकी समझ है ....आभार

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  3. क्यूँ मुस्कुराएंगे ... गुर्राना झेलिये अब

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  5. बहुत अच्छी रचना है .....may ne cal ke esnumber pe magar cal nahi lagi aap ki lekh muje bahut aacha lagatha hai.dil se likhate hai

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