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गुरुवार, 24 नवंबर 2011

आज अचानक नानी की तस्वीर हाथ आ गयी


आज अचानक 
नानी की 
तस्वीर हाथ आ गयी
बचपन की 
यादें ताज़ा हो गयी
नानी का
सुन्दर गोरा चेहरा
आँखों के सामने आ गया
उनकी मीठी झिडकी
सुनने का समय आ गया 
इतने दिन याद 
क्यों नहीं किया ?
मुझको कैसे भूल गया?
उलहाना मिलने वाला  है 
भविष्य में 
कभी ऐसा नहीं करने की 
नसीहत भी मिलने वाली है
नानी ने ना झिड़का
ना उल्हाना दिया
ना ही कोई सवाल पूछा
स्नेह से सर पर हाथ रखा
फिर केवल इतना सा कहा
मुझे पता है
बहुत व्यस्त रहता है तूँ
पर कभी मुझे भी याद
कर लिया कर
निरंतर आकाश से 
तुझे देखती हूँ
तेरी ख़ुशी के लिए 
प्रार्थना करती हूँ
मैं खामोशी से नानी को
देखता रहा
ध्यान से उनकी बातें 
सुनता रहा
मन उनकी गोद में
छुपने का करना लगा
नानी से क्षमा मांग लूं
फिर ऐसा कभी नहीं
करूंगा
उनसे कह दूं
तभी माँ की आवाज़
मुझे नानी की यादों से
बाहर ले आयी
माँ कह रह थी
आज मेरे सपने में 
नानी आयी थी
बच्चों के बारे में
पूछ रही थी
साथ ही कह रही थी
आज कल बच्चे पुरखों को
याद क्यों नहीं करते ?
क्यों सिर्फ अपने में 
खोये रहते हैं ?
ये संस्कार तो बड़ों ने
कभी नहीं दिए
फिर स्वार्थ से इतना 
कैसे भर गए ?
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

24-11-2011
1812-83-11-11

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