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रविवार, 13 नवंबर 2011

तुम्हें देखा तो नहीं


तुम्हें देखा तो नहीं

फिर भी तुम्हें देखा सा

लगता मुझको

पास होने का
अहसास होता मुझको
तुम्हारा नाम मेरे
जहन में रहता
लबों से बुदबुदाता
रहता
अंदाज़ से ख्यालों में 
चेहरा बनाता रहता
नहीं जानता

कब मिलोगे मुझसे

पर निरंतर तुम्हारा
ख्याल 
 मुझे सुकून देता
तुम्हें देखा तो नहीं
फिर भी तुम्हें 
देखा सा लगता 
मुझको
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"

13-11-2011
1786-57-11-11

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