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रविवार, 20 नवंबर 2011

इसी में खुश रहती हूँ


उसकी चुनडी फटी हुयी
लहंगा पुराना पैबंद
लगा होता था
पर उसे रंग बिरंगी
महंगी चूड़ियां
पहनने का शौक था
जब भी आती
कलाईयों में पहनी
चूड़ियों को खनकाती
रहती
एक बार रहा ना गया
उसे कह ही दिया
इतने पैसे चूड़ियों पर
खर्च करती हो
कुछ पैसे कपड़ों पर भी
खर्च कर लिया करो
उसका मुंह रुआंसा 
हो गया
आँखें भर आयी
कहने लगी बाबूजी
चूड़ियां खरीदती नहीं हूँ
तीसरी गली वाले 
बाबूजी की
चूड़ियों की दूकान है
वहां झाडू लगाती हूँ
काम के बदले में
पैसे की जगह चूड़ियां
लेती हूँ
रंग बिरंगी चूड़ियां
मुझे गरीबी का
अहसास नहीं होने देती
एक यही इच्छा है
जो पूरी कर सकती हूँ
इसी में खुश रहती हूँ
20-11-2011
1802-73-11-11

7 टिप्‍पणियां:

  1. kuch ehsaas khreede nahin ja sakte
    unko jeene ke liye ehsaas hone chahiye ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. कविता में अभिव्यक्त मासूम का दर्द दिल को छू लेता है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. भावपूर्ण रचना,बहुत अच्छे भावों को शब्दबद्ध किया है आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. mridula pradhan said...
    कुछ एहसास खरीदे नहीं जा सकते
    उनको जीने के लिए एहसास होने चाहिए ...
    wakayee.....ehsaas ki kalpna nahin hoti sirf mahsoos kiya ja sakta hai.
    November 22, 2011 1:27 PM
    mridula pradhan said...
    रंग बिरंगी चूड़ियां
    मुझे गरीबी का
    अहसास नहीं होने देती
    bahut badi baat......
    November 22, 2011 1:28 PM

    उत्तर देंहटाएं
  5. Anita said...
    वाह ! चूडियाँ यदि अमीरी का अहसास दिलाती हैं तो सचमुच वे अनमोल हैं...
    November 22, 2011 1:36 PM
    वाणी गीत said...
    सबकी अपनी अपनी ख़ुशी ...खुशियों की वजह जितनी छोटी , वह उतना ही अमीर !
    November 22, 2011 1:44 PM
    सदा said...
    रंग बिरंगी चूड़ियां
    मुझे गरीबी का
    अहसास नहीं होने देती

    बहुत ही बढि़या ।
    November 22, 2011 2:08 PM
    महेन्द्र श्रीवास्तव said...
    बहुत सुंदर
    November 22, 2011 2:34 PM
    Kailash C Sharma said...
    कुछ एहसास खरीदे नहीं जा सकते
    उनको जीने के लिए एहसास होने चाहिए ...

    ....बहुत सुन्दर...छोटी छोटी खुशियों को समेटना ही जीवन है...
    November 22, 2011 3:36 PM
    वन्दना said...
    खुशियाँ कैसे भी समेटी जा सकती हैं इस भाव को दर्शाती सुन्दर रचना के लिये बधाई राजेन्द्र जी को।
    November 22, 2011 3:45 PM

    उत्तर देंहटाएं
  6. अनुपमा पाठक22 नवंबर 2011 को 7:11 pm

    अनुपमा पाठक said...
    अमूल्य एहसास!
    November 22, 2011 5:58 PM

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज आपकी यह कविता राशि प्रभा जी के "वटव्रक्ष" पर पढ़ी आपकी इस कविता न आज दिल छूलिया... लाजवाब प्रस्तुति... समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं