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बुधवार, 16 नवंबर 2011

ठहरे पानी को आइना समझ लिया


ठहरे पानी को
आइना समझ लिया
बड़ी हसरत से 
उसमें अपना अक्स
देखने लगा
एक कंकर गिरा
आइना टूट गया 
सपना चूर चूर
हो गया
मैं जहां था वहीँ
खडा रह गया
उनकी
मुस्काराहट को
मोहब्बत का आगाज़
समझ लिया 
16-11-2011
1795-66-11-11

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