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सोमवार, 14 नवंबर 2011

बाल दिवस पर कविता -बड़ा चतुर होता है,बाल सुलभ मन




बड़ा चतुर होता है
बाल सुलभ मन
माँ डांटे तो
पिता की गोद में
पिता डांटे तो
माँ की गोद में
दोनों डांटे तो
दादा दादी की
गोद में
जा छुपता है
बाल सुलभ मन
मीठी बातों से
लुभाता है
इच्छाएं पूरी 
रवाता है
बड़ा चतुर होता है
बाल सुलभ मन
बड़ा चंचल होता है
बाल सुलभ मन

डॉ.राजेंद्र तेला,निरंतर
14-11-2011
1788-59-11-11

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह ...बहुत ही बढि़या ...।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर प्रस्‍तुति...
    बाल दिवस की शुभकामनाये.

    उत्तर देंहटाएं