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रविवार, 20 नवंबर 2011

रेत के घरोंदे


बहुत
समझाता था उसे
सपनों पर
विश्वास मत किया करो
समुद्र किनारे रेत के
घरोंदे  मत बनाया करो
कभी कोई तेज़ लहर 
आयेगी
घर को बहायेगी
अपने सपनों को टूटते देख
तुम व्यथित हो कर
दुःख मनाओगे
बार बार घरोंदे को
याद कर आंसू बहाओगे
घरोंदे बनाने ही हो
तो मेहनत,लगन और सब्र की
सुद्रढ़  नीव से बनाओ
जो आसानी से नहीं टूटे
जीवन भर चैन से रहने दे  
समय की तेज़ हवाएं
भाग्य की लहरें
कुछ बिगाड़ ना सके
निश्चिंतता से सो सको
पर कभी
बात नहीं मानी उसने
निरंतर रेत के घरोंदे से
सपनों पर विश्वास
करता रहा
शीघ्र पाने की इच्छा में
उतावलापन दिखाता  रहा
जीवन भर
बेघर और असंतुष्ट रहा
असंतुष्ट ही
संसार से विदा हुआ
20-11-2011
1803-73-11-11

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