ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 7 नवंबर 2011

किस रात के ख्वाब सुनाऊँ? हर रात के ख्वाब सुहाने


किस रात के ख्वाब सुनाऊँ?
हर रात के ख्वाब सुहाने
मिला उन सबसे ख़्वाबों  में
बरसों से जो दिल में बसे
पर नहीं अब इस दुनिया में
बने हर रात नए अफ़साने
पर मिले नहीं किसी के
पते ठिकाने
गुम हो गए रात के साथ
छुप गए सवेरे आते आते
छोड़ गए यादों के मंजर
किस रात के ख्वाब सुनाऊँ?
हर रात के ख्वाब सुहाने    
06-11-2011
1752-21-11-11
E

2 टिप्‍पणियां:

  1. गुम हो गए रात के साथ
    छुप गए सवेरे आते आते
    छोड़ गए यादों के मंजर
    हमारे लिए
    किस रात के ख्वाब सुनाऊँ?
    हर रात के ख्वाब सुहाने ...............dil ko chute huye shabd .......har bar sunder rachna

    उत्तर देंहटाएं
  2. यादों की हर रात सुहानी होती है॥ बहुत खूब सुंदर अभिव्यक्ति....

    उत्तर देंहटाएं