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शनिवार, 19 नवंबर 2011

क्षणिकाएं -5





मंजिल

मंजिल की तलाश में
ज़िन्दगी गुजर जाती
मिलती किसी को नहीं
*****
चिंतन

चिंतन
बिना जीवन नहीं
जीवन
बिना चिंतन नहीं
एक आगे आगे
दूजा पीछे पीछे
*****

सत्य सुनना


दूसरों का
सत्य सब सुनना
चाहते
खुद का सत्य
छुपा कर रखना
चाहते
*****
सत्य कहना

सत्य जानते हैं
कहने से पहले

तोलते हैं
कहूँ ना कहूँ
के भंवर में

डोलते हैं
*****
बच्चे- बड़े

बच्चे चाहते
बड़े हो जाएँ
बड़े चाहते
बच्चे बन जाएँ
*****
बचपन-बुढापा

बड़े बचपन को
भूल नहीं पाते
बच्चे बुढापे को
समझ नहीं पाते
*****
19-11-2011
1800-71-11-11

2 टिप्‍पणियां:

  1. गहन चिंतन ... सारी क्षणिकाएँ बहुत अच्छी हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन क्षणिकायें …………बेहद गहन चिन्तन्।

    उत्तर देंहटाएं