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रविवार, 2 अक्तूबर 2011

मन के आकाश में

मन के आकाश में
आशाओं के अनेक  
सूरज
निरंतर उदय होते
मन को उजाला देते
कुछ समय के साथ
अस्त होते
कुछ  मंद हो जाते
आशा,निराशा के भाव
जन्म लेते रहते
जीवन पर्यंत मनुष्य को
इच्छाओं के
मकड़ जाल में फंसाए
रखते
जीवन भर आशंकाओं के
चौराहे पर खड़े
रखते
02-10-2011
1597-06-10-11

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