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गुरुवार, 20 अक्तूबर 2011

सारे मौसम देख लिए

सारे मौसम देख लिए
अब किस मौसम का
इंतज़ार करूँ
बहारों को खिजा में
बदलते देखा
महकते फूलों को
मुरझाते देखा
अरमानों को
निरंतर टूटते देखा
रिश्तों का
सच जान लिया
हसरतें
दम तोड़ चुकी
देखने की
तमन्ना बची नहीं
अब और सहने की
ताकत भी नहीं
सारे मौसम देख लिए
अब किस मौसम का
इंतज़ार करूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
 
20-10-2011
1680-87-10-11

1 टिप्पणी:

  1. खूबसूरत प्रस्तुति |

    त्योहारों की नई श्रृंखला |
    मस्ती हो खुब दीप जलें |
    धनतेरस-आरोग्य- द्वितीया
    दीप जलाने चले चलें ||

    बहुत बहुत बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं