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शनिवार, 29 अक्तूबर 2011

फिर से मुस्कारा दो


क्यों मन ही मन
रोते हो?
दिल को तकलीफ
देते हो
किस बात से घबराते हो?
क्यों खुल कर नहीं
कहते हो ?
निरंतर ग़मों का बोझ
बढाते हो
अब जहन से झिझक
हटा दो
जुबाँ पर लगा ताला
खोल दो
अपना समझ कर
यकीन हम पर कर लो 
दिल की बात बता दो
अपनी घुटन कम
कर लो
फिर से मुस्कारा दो
29-10-2011
1719-126-10-11

9 टिप्‍पणियां:

  1. राजेन्द्र जी नमस्कार, बहुत सुन्दर किसी को मुस्कराहट देने से अच्छी सोच क्या हो सक्ती है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अपना समझ कर
    यकीन हम पर कर लो
    दिल की बात बता दो
    अपनी घुटन कम
    कर लो
    फिर से मुस्कारा दो

    वाह ..

    उत्तर देंहटाएं